अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला को समर्पित किए गए चढ़ावे और दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक पड़ताल और कड़ी सिफारिशों के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में जो एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है, उसमें आठ लोगों को नामजद किया गया है। अब पूरी जांच इन आरोपियों की सटीक भूमिका और उनके संगठित नेटवर्क पर केंद्रित हो चुकी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी आरोपी बाहरी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मंदिर के खजाने की गिनती, उसकी कड़ी निगरानी और दान से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्थाओं का अभिन्न हिस्सा थे। जांच एजेंसियों की पैनी नजर अब आरोपियों के ठिकानों से बरामद हुई नकदी और उनके बैंक खातों में हुए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन पर है। हालांकि, कानूनी तौर पर ये सभी आरोप अभी जांच के अधीन हैं। आइए जानते हैं कि इस कथित घोटाले में किस आरोपी की क्या भूमिका थी:
मुख्य सूत्रधार: टिन्नू यादव के पास रहती थी खजाने की चाबी
इस पूरे कथित गबन में जिस व्यक्ति का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है, वह राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव है। एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक, टिन्नू यादव को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बेहद करीबी और उनका पूर्व ड्राइवर बताया गया है।
जांच एजेंसियों का दावा है कि मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं में इस शख्स का गहरा दखल और प्रभाव था। सबसे अहम बात यह है कि टिन्नू ही दान राशि की गणना प्रक्रिया की पूरी निगरानी करता था और अत्यधिक सुरक्षित माने जाने वाले ‘गणना कक्ष’ (जहां नकदी गिनी जाती थी) की चाबियां भी उसी की जेब में रहती थीं। पुलिस और जांच एजेंसियां उसे इस पूरे खेल का ‘मास्टरमाइंड’ और प्रमुख किरदार मानकर सघन पूछताछ कर रही हैं।
गिनती करने वाली टीम के सदस्य कैसे बने आरोपी?
चढ़ावे की गिनती करने के लिए एक विशेष टीम गठित थी, जिसके सदस्यों ने ही कथित तौर पर इस सुनियोजित हेराफेरी को अंजाम दिया:
- सुभाष चंद्र श्रीवास्तव: यह पेशे से एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी (रिटायर्ड बैंकर) हैं। बैंकिंग के उनके लंबे अनुभव को देखते हुए ही उन्हें राम दरबार में आने वाले दान की भारी-भरकम राशि को गिनने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन अब उनकी भूमिका ही सवालों के घेरे में है।
- लवकुश मिश्रा: एफआईआर के अनुसार, लवकुश भी मंदिर में प्राप्त होने वाली नकदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की नियमित गणना की प्रक्रिया से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे।
- अनुकल्प मिश्रा: इन्हें भी दान राशि की गणना करने वाली उस टीम का सक्रिय सदस्य बताया गया है, जिस पर गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।
लेखा-जोखा और दान पेटियों तक पहुंच रखने वाले चेहरे
न केवल नकदी गिनने वाले, बल्कि दान का पूरा वित्तीय हिसाब-किताब रखने वाले कर्मचारी भी इस कथित गबन में शामिल बताए जा रहे हैं:
- अविनाश शुक्ला: यह वह शख्स हैं, जिन पर राम मंदिर के चढ़ावे और दान के पूरे हिसाब-किताब (अकाउंटिंग) से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी थी।
- मनीष कुमार यादव: जांच एजेंसियों की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि मनीष की पहुंच सीधे तौर पर मंदिर के पवित्र चढ़ावे और दान पेटियों तक थी। इसी निर्बाध पहुंच को आधार बनाते हुए उन्हें इस मामले में सह-आरोपी बनाया गया है।
- करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा: इन दोनों आरोपियों को भी दान राशि तथा चढ़ावे की दैनिक गणना के दौरान कथित रूप से वित्तीय अनियमितताएं बरतने और पूरी प्रक्रिया का हिस्सा होने के आरोप में मुकदमे में नामजद किया गया है।





















































