अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि और चढ़ावे की कथित धांधली का मामला लगातार गहराता जा रहा है। ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों, महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब आध्यात्मिक जगत के बड़े नाम भी मुखर हो गए हैं। गाजियाबाद में एक विशेष बातचीत के दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस घटनाक्रम को महज एक वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की ‘आस्था की लूट’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि केवल कुछ इस्तीफों से मामले की इतिश्री नहीं होनी चाहिए, बल्कि इस पूरे घोटाले की तह तक जाकर निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।
महज आर्थिक चोरी नहीं, आस्था पर प्रहार: आचार्य प्रमोद
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि राम मंदिर कोई साधारण व्यावसायिक प्रतिष्ठान या फैक्ट्री नहीं है, जहाँ चोरी होने पर मामूली एफआईआर से काम चल जाए। यह देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की भक्ति और विश्वास का केंद्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला मात्र कुछ लाख या करोड़ रुपये का नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें हजारों करोड़ रुपये तक फैली हो सकती हैं। आचार्य के अनुसार, नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए इस्तीफे देना तो महज शुरुआत है; वास्तविक आवश्यकता यह है कि इस तंत्र में मौजूद भ्रष्ट चेहरों को बेनकाब किया जाए। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में जांच पारदर्शी होगी और दोषियों को कानून के शिकंजे से कोई नहीं बचा पाएगा।
विपक्ष पर निशाना: ‘विवाद की राजनीति से बाज आए विरोधी’
दान और चढ़ावे के मुद्दे पर मचे हंगामे के बीच आचार्य प्रमोद कृष्णम ने विपक्षी दलों पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग दशकों तक राम मंदिर के निर्माण का विरोध करते रहे, वे आज इसी मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर मंदिर की गरिमा को ठेस पहुँचाने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि राम मंदिर की भव्यता और पवित्रता किसी छोटे-मोटे विवाद से प्रभावित होने वाली नहीं है। विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग हर संवेदनशील मुद्दे को विवाद में बदलकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास करते हैं, लेकिन अब देश की जनता सच और झूठ का अंतर बखूबी समझती है।
पुजारियों की मांग: ‘दान की मर्यादा और पारदर्शिता अनिवार्य’
इस पूरे प्रकरण पर नासिक के गंगा गोदावरी पंचकोटी पुरोहित संघ के अध्यक्ष सतीश पुरोहित ने भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में भक्त जो कुछ भी अर्पित करते हैं—चाहे वह स्वर्ण हो, रजत हो या नकद राशि—वह पूरी तरह से प्रभु श्री राम को समर्पित होता है। दान के रूप में दी गई वस्तु पर किसी भी व्यक्ति का निजी अधिकार नहीं रह जाता।
सतीश पुरोहित ने जोर देकर कहा कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और पवित्रता का बना रहना अनिवार्य है, क्योंकि ये केंद्र सामाजिक आस्था की धुरी होते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश प्रशासन और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आपसी समन्वय के साथ जांच प्रक्रिया को पूरा करेंगे, ताकि मंदिर की शुचिता को बहाल किया जा सके। भविष्य में ऐसी किसी भी अनियमितता की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया है।





















































