नोएडा: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सार्वजनिक परिवहन के कायाकल्प की दिशा में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के लिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत नोएडा-ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर कुल 33 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ेंगी, जो एनसीआर के निवासियों को न केवल प्रदूषण मुक्त यात्रा का अनुभव देंगी, बल्कि आवागमन को सुगम और सुरक्षित भी बनाएंगी। बोटेनिकल गार्डन को मुख्य हब के रूप में विकसित कर इन बसों को सेक्टर-62, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और कौशांबी जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों से जोड़ा गया है।
अत्याधुनिक सुरक्षा कवच से लैस होंगी ई-बसें
यात्रियों की सुरक्षा को इस नई परिवहन सेवा का मूल आधार बनाया गया है। इन बसों को ‘स्मार्ट मोबिलिटी’ के मानकों पर खरा उतारने के लिए विशेष तकनीकी फीचर्स से सुसज्जित किया गया है। हर बस में सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है, जिसकी लाइव मॉनिटरिंग सीधे ड्राइवर के केबिन से की जा सकेगी। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए बसों में पैनिक बटन और एसओएस अलर्ट सिस्टम जैसी सुविधाएं दी गई हैं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में यात्री पलक झपकते ही मदद के लिए चालक को सूचित कर सकें। इमरजेंसी गेट की उपस्थिति भी इन बसों को सफर के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाती है।
ग्रीन हाइड्रोजन: भविष्य के टिकाऊ परिवहन की शुरुआत
इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण यीडा (YEIDA) क्षेत्र में शुरू की गई ‘ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन’ आधारित बस सेवा रही। एनटीपीसी दादरी के सहयोग से उतारी गई ये तीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसें न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन के लिए एक मॉडल साबित होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन बसों का उत्सर्जन शून्य है, क्योंकि ये धुएं की जगह केवल जलवाष्प छोड़ती हैं।
इस परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह पहल सालाना करीब 1000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोकने में सक्षम होगी, जो लगभग 1750 नए पेड़ लगाने के बराबर सकारात्मक प्रभाव डालेगी।
तकनीकी क्षमता और भविष्य की राह
देश के सबसे बड़े ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन से लैस यह परियोजना परिवहन जगत में मील का पत्थर है। इन बसों की तकनीकी खूबियों का जिक्र करें तो:
- क्षमता: प्रत्येक बस में 42 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है।
- लंबाई: बसों का आकार 12 मीटर रखा गया है।
- रेंज: एक बार हाइड्रोजन रिफिल करने पर ये बसें 750 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती हैं।
यह पहल न केवल एनसीआर के वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है, बल्कि यह भविष्य के हरित ऊर्जा परिवहन की मजबूत बुनियाद भी है। मुख्यमंत्री योगी ने इस अवसर पर कहा कि ऐसी परियोजनाएं ‘विकसित भारत’ के संकल्प और ‘ग्रीन मोबिलिटी’ के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।





















































