दिल्ली-एनसीआर में आवागमन को सुगम और आधुनिक बनाने की दिशा में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली के दक्षिण और दक्षिण-पूर्व इलाकों को सीधे तौर पर जोड़ने के लिए प्रस्तावित ‘तुगलकाबाद-कालिंदी कुंज कॉरिडोर’ अब धरातल पर उतरने की तैयारी में है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत DMRC ने तीन प्रमुख स्टेशनों के डिजाइनिंग कार्य के लिए बोलियां (bids) आमंत्रित कर दी हैं। यह विस्तार न केवल दिल्ली के भीतर कनेक्टिविटी को सुधारेगा, बल्कि नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम के बीच रोजाना यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों के लिए सफर को तेज और सीधा बना देगा।
तीन अहम स्टेशनों के डिजाइन पर केंद्रित है प्रोजेक्ट
DMRC ने इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के तीन प्रमुख केंद्रों—सरिता विहार डिपो, मदनपुर खादर और कालिंदी कुंज इंटरचेंज स्टेशन—के लिए डिटेल्ड डिजाइन कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चयनित कंसल्टेंट इन स्टेशनों के न केवल आर्किटेक्चरल डिजाइन तैयार करेंगे, बल्कि बिल्डिंग सर्विस प्लान, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल प्रणालियों का भी खाका खींचेंगे। लगभग 2.4 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस कंसल्टेंसी कॉन्ट्रैक्ट की अवधि 48 महीने निर्धारित की गई है। यह कदम दिल्ली मेट्रो के फेज V(A) के अंतर्गत कार्यान्वयन की दिशा में एक निर्णायक शुरुआत है।
कनेक्टिविटी का नया अध्याय: किन इलाकों को मिलेगा फायदा?
इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत इसकी रणनीतिक स्थिति है। फिलहाल, दक्षिण-पूर्व दिल्ली के कई घने इलाकों के निवासियों को मेट्रो सुविधा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या वे सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भर रहते हैं। कालिंदी कुंज में मौजूदा मेट्रो नेटवर्क के साथ इस नए लिंक के जुड़ने से एक निर्बाध ट्रांजिट हब तैयार होगा। इससे नोएडा से फरीदाबाद और गुरुग्राम की ओर जाने वाले यात्रियों को एक ऐसा ‘सीमलेस कनेक्टिविटी’ नेटवर्क मिलेगा, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
‘गोल्डन लाइन’ और बढ़ते शहरीकरण का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल चुकी है, ‘गोल्डन लाइन’ का एक महत्वपूर्ण विस्तार है। यह रूट ऐसे क्षेत्रों से होकर गुजरता है जहाँ रिहायशी और कमर्शियल गतिविधियों में भारी उछाल आया है। उम्मीद है कि परिचालन शुरू होने के पहले दिन से ही इस लाइन पर भारी भीड़ देखने को मिलेगी। मेट्रो की बेहतर पहुंच से मौजूदा इंटरचेंज स्टेशनों पर दबाव कम होगा और लोग अपनी निजी गाड़ियों की तुलना में सार्वजनिक परिवहन को ज्यादा प्राथमिकता देंगे, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा।
समयसीमा और भविष्य की कार्ययोजना
प्रस्तावित योजना के अनुसार, इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य वर्ष 2026 में धरातल पर शुरू होने की प्रबल संभावना है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तुगलकाबाद-कालिंदी कुंज सेक्शन के अलावा, यह फेज V(A) पैकेज एरोसिटी से टर्मिनल-1 के बीच ‘गोल्डन लाइन’ के 2.2 किलोमीटर के विस्तार और ‘सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर’ जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का हिस्सा है।
दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो का यह जाल एयरपोर्ट तक बेहतर कनेक्टिविटी, सरकारी कार्यालयों तक त्वरित पहुंच और तेजी से बढ़ते उपनगरों के लिए एक लाइफलाइन साबित होगा। जैसे ही यह प्रोजेक्ट डिजाइन चरण से निकलकर निर्माण की दहलीज पर पहुंचेगा, यह राजधानी के सबसे बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक के रूप में अपनी जगह बना लेगा।





















































