मुजफ्फरनगर में आधी रात को पहली बार जुटी ऐतिहासिक किसान महापंचायत
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी और किसानी जमीन मुजफ्फरनगर से एक बार फिर बड़े आंदोलन की आहट सुनाई देने लगी है। राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) मैदान में गुरुवार की देर रात ऐतिहासिक रूप से पहली बार आयोजित की गई रात्रि किसान महापंचायत में हजारों अन्नदाताओं की मौजूदगी रही। इस विशेष मंच से भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकारों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसानों के बुनियादी मुद्दों और लंबित मांगों का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो देश एक और व्यापक किसान आंदोलन का गवाह बनेगा।
गन्ने का रेट 500 रुपये प्रति क्विंटल करने और एमएसपी कानून की उठी मांग
महापंचायत में मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने दो प्रमुख मांगों को लेकर शासन-प्रशासन की नीतियों पर कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने दो टूक कहा कि आगामी नए पेराई सत्र के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल तय करे। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि देश भर के किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैधानिक गारंटी देने की बहुप्रतीक्षित मांग को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। टिकैत ने दोहराया कि जब तक एमएसपी पर ठोस कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक अन्नदाता आर्थिक सुरक्षा हासिल नहीं कर सकता।
जमीन के सर्किल रेट और कृषि भूमि संरक्षण पर भी सरकार से सवाल
महापंचायत के मंच से केवल फसलों के मूल्य का ही मुद्दा नहीं उठा, बल्कि काश्तकारों की जमीनों से जुड़े संकट पर भी मंथन किया गया। भाकियू प्रवक्ता ने मांग उठाई कि ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों के सर्किल रेट में व्यावहारिक बढ़ोतरी की जाए और विकास परियोजनाओं के नाम पर उपजाऊ कृषि भूमि के अनियंत्रित अधिग्रहण पर रोक लगाकर किसानों की जमीन की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। राकेश टिकैत ने उपस्थित किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में अपनी जायज मांगों को मनवाने के लिए संघर्ष के मार्ग पर चलना ही एकमात्र विकल्प रह गया है।
प्रशासन को सौंपा गया 16 सूत्रीय ज्ञापन, भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत भी रहे मौजूद
कार्यक्रम के समापन से पूर्व देर रात जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर तलब कर केंद्र तथा राज्य सरकार के नाम 16 सूत्रीय मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। इस असाधारण महापंचायत की अध्यक्षता और संचालन के दौरान भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, राकेश टिकैत सहित संगठन के प्रमुख रणनीतिकारों व पदाधिकारियों ने भी विचार रखे।
दूसरी ओर, सरकारी आंकड़ों और पिछले निर्णयों पर नजर डालें तो पेराई सत्र 2025-26 के दौरान शासन ने गन्ना दरों में 30 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया था। इस बढ़ोतरी के तहत अगेती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था, जिसे किसान संगठन वर्तमान बढ़ती लागत के मुकाबले नाकाफी बता रहे हैं।





















































