इश्तहारों की चमक बनाम जमीनी हकीकत: सपा मुखिया का तीखा प्रहार
उत्तर प्रदेश की सियासत में रोजगार, निवेश और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया है कि राज्य में पूंजी निवेश, उद्योग और रोजगार के दावे केवल समाचार पत्रों के पन्नों तक सिमट कर रह गए हैं। लखनऊ स्थित पार्टी प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि देश और किसानों के सामने खड़ी सबसे बड़ी बाधा खुद भाजपा है, क्योंकि यह सत्ताधारी दल समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय नए संकट खड़े करने में जुटा है। उनका कहना था कि प्रदेश की समस्त परेशानियों से निजात पाने का एकमात्र रास्ता सत्ता से भाजपा की विदाई है।
सरकारी नौकरियों के दावों पर कटाक्ष: ‘विज्ञापनों के अनुसार राज्य में कोई बेरोजगार नहीं’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा निष्पक्षता के साथ साढ़े नौ वर्षों के कार्यकाल में साढ़े नौ लाख युवाओं को विभिन्न पदों के नियुक्ति पत्र वितरित करने तथा आने वाले छह महीनों के भीतर एक लाख अतिरिक्त सरकारी नौकरियां देने की घोषणा के तुरंत बाद अखिलेश यादव ने यह पलटवार किया। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएससी) के माध्यम से चुने गए 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे थे। इस पर तंज कसते हुए सपा मुखिया ने कहा कि सरकार के प्रचार माध्यमों और विशाल विज्ञापनों का गणित देखें तो लगेगा कि उत्तर प्रदेश की धरती पर कोई बेरोजगार बचा ही नहीं है, जबकि यथार्थ में न तो उद्योग आ रहे हैं और न ही युवाओं के हाथों में काम है।
डिजिटल बनाम जमीनी मुकाबला: ‘नया चुनावी दौर, दोनों मोर्चों पर डटकर लड़ेंगे’
आगामी चुनावी चुनौतियों का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब मुकाबला पारंपरिक मैदान के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि डिजिटल मोर्चे पर प्रभावी सामग्री तैयार नहीं की जाएगी तो कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है। सत्तारूढ़ खेमे द्वारा प्रसारित किए जा रहे वीडियोज के स्रोतों पर प्रश्न उठाते हुए उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ताओं ने तथ्यों के आधार पर मजबूत और रचनात्मक जवाब तैयार किए हैं। इसी क्रम में प्रेस वार्ता के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा तैयार किया गया एक वीडियो भी सार्वजनिक किया गया, जिसमें सरकारी नीतियों की विसंगतियों को रेखांकित किया गया था।
विपक्षी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के दमन का लगाया गंभीर आरोप
अखिलेश यादव ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कई हालिया घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक जगराम पासवान के भाई को केवल एक वीडियो साझा करने के चलते हिरासत में ले लिया गया। वहीं रायबरेली में 17 सितंबर को आयोजित छात्र सभा के शांतिपूर्ण सम्मेलन में सत्तापक्ष के उपद्रवियों द्वारा व्यवधान डाला गया और पुलिस तंत्र मूकदर्शक बनकर खड़ा रहा। इसके साथ ही उन्होंने संतकबीरनगर में सपा सांसद लक्ष्मीकांत निषाद के काफिले पर हुए पथराव की कठोर शब्दों में भर्त्सना की और कहा कि पुलिस ने चुने हुए जनप्रतिनिधि को उचित सुरक्षा और गरिमा प्रदान नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) वर्ग से जुड़े लोगों को सत्ता द्वारा चुन-चुनकर प्रताड़ित किया जा रहा है और झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है।
नकारात्मक प्रचार, डूसू चुनाव और ग्राम पंचायतों के पुस्तकालयों पर तीखे सवाल
भाजपा की कार्यशैली को आड़े हाथों लेते हुए सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीते एक दशक में हजारों करोड़ रुपये केवल विपक्ष की छवि धूमिल करने और भ्रामक प्रचार फैलाने पर खर्च किए गए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनावों का उदाहरण देते हुए उन्होंने सवाल दागा कि जब राष्ट्रीय राजधानी में छात्र राजनीति के चुनाव हो सकते हैं, तो उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव क्यों रोके गए हैं? नोटबंदी की नीतियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इससे न तो महंगाई थमी और न ही भ्रष्टाचार पर लगाम लगी, उल्टे सीमा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ीं।
ग्रामीण विकास के दावों पर प्रश्न उठाते हुए अखिलेश ने कहा कि सरकार की ओर से 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में डिजिटल पुस्तकालय संचालित करने के बड़े-बड़े दावे किए गए, किंतु नोएडा जैसे विकसित औद्योगिक क्षेत्र के पुस्तकालयों में भी किताबों, फर्नीचर और बुनियादी ढांचों का भारी अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की योजनाएं जनकल्याण के नाम पर गरीब तबके की गाढ़ी कमाई छीनने का जरिया बन चुकी हैं और वर्तमान व्यवस्था में प्रशासनिक भ्रष्टाचार अपने चरम स्तर पर पहुंच गया है।
सपा का कुनबा बढ़ा: कई जनपदों के प्रमुख नेता पार्टी में शामिल
प्रेस वार्ता के दौरान विपक्षी एकजुटता और जनाधार बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न जिलों के प्रमुख नेताओं ने समाजवादी पार्टी का दामन थामा। बांदा के पूर्व विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के पुत्र मयंक द्विवेदी, श्रावस्ती से नंद किशोर गिरि, पूर्व नगर निकाय चेयरमैन जितेंद्र गुप्ता और कानपुर देहात के जुनैद सहित कई स्थानीय नेताओं ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ सपा की आधिकारिक सदस्यता ग्रहण की, जिसका अखिलेश यादव ने स्वागत किया।





















































