लखनऊ। उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत के सरकारी विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव और जर्जर व्यवस्था को लेकर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सरकारों पर तीखा हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री ने देशभर में युवाओं और छात्रों द्वारा चलाए जा रहे ‘स्कूल ठीक करो’ आंदोलन का खुला समर्थन करते हुए कहा कि जिन मासूम बच्चों के हाथ में किताबें और खेलकूद के साधन होने चाहिए, उन्हें आज प्राथमिक सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरने को विवश होना पड़ रहा है।
जेन-अल्फा और अभिभावकों की गहरी चिंता
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि वर्ष 2013 के बाद जन्मी नई पीढ़ी (जेन-अल्फा), उनके स्कूली साथी और अभिभावक अपने सुरक्षित व उज्ज्वल भविष्य को लेकर लगातार संघर्षरत हैं। एक बेहतर कल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद पाले इन परिवारों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश और समूचे उत्तर भारत के सरकारी शिक्षण संस्थानों की बदहाल जमीनी हकीकत ने छात्रों और अभिभावकों को मुखर होने पर मजबूर कर दिया है। इसी वजह से वे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) यानी जेन-जी की ओर से शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से पूरे जोश के साथ जुड़ रहे हैं।
बाबा साहेब के ‘शिक्षित बनो’ संदेश और बसपा शासन का उल्लेख
बसपा प्रमुख ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध आह्वान ‘शिक्षित बनो’ का संदर्भ देते हुए रेखांकित किया कि वंचित और शोषित वर्ग के उत्थान के लिए बुनियादी शिक्षा सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि केंद्र व राज्यों की पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा लगातार उपेक्षित रहे दबे-कुचले तबकों के अधिकारों, सम्मान और शिक्षा के लिए उत्तर प्रदेश में बसपा की चारों सरकारों के दौरान ठोस कदम उठाए गए थे। संविधान की समतावादी और कल्याणकारी भावना के अनुरूप हर परिवार को आजीविका, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मसम्मान से परिपूर्ण जीवन देने की ईमानदार नीति पर काम किया गया था।
सरकारी स्कूलों की उपेक्षा और आरक्षण को निष्क्रिय करने का आरोप
मायावती ने मौजूदा व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों के ढांचे को सुधारने के बजाय शासन स्तर पर इनकी लगातार घोर अनदेखी की जा रही है। उन्होंने चिंता जताई कि आरक्षण के प्रावधानों की तरह ही पूरी प्राथमिक शिक्षा प्रणाली को भी धीरे-धीरे निष्क्रिय करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। इस उपेक्षापूर्ण नीति के तहत हजारों प्राथमिक स्कूलों को बंद किया जा रहा है, जिसका बसपा आरंभ से विरोध करती रही है। आज स्थिति यह हो चुकी है कि जर्जर भवनों, शिक्षकों के खाली पदों, पीने के स्वच्छ पानी, शौचालयों और सफाई जैसी नितांत आवश्यक व्यवस्थाओं की कमी से त्रस्त होकर मासूम बच्चे खुद अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और आंदोलन करने को बाध्य हैं।
सरकारों को चेतावनी: बल प्रयोग से बचें, मांगों पर दें ध्यान
बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों के प्रशासनों को भी स्पष्ट नसीहत दी है। उन्होंने मांग की कि सभी सरकारें जेन-अल्फा पीढ़ी के इन नन्हें छात्र-छात्राओं की जायज मांगों और बुनियादी शैक्षिक जरूरतों पर पूरी संवेदनशीलता, स्पष्ट नीति और सही नीयत के साथ तुरंत ध्यान दें। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने बुनियादी हक की मांग कर रहे मासूम बच्चों पर किसी भी प्रकार का बल प्रयोग करने से सरकारों को पूरी तरह परहेज करना चाहिए।





















































