लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके अलीगंज में घटित हुए रूह कंपा देने वाले अग्निकांड मामले में पुलिस प्रशासन ने अपनी जांच पूरी करते हुए अदालत की चौखट पर बड़ा कदम उठाया है। 15 बेकसूर जिंदगियों को लील जाने वाले इस दर्दनाक हादसे के 87 दिन बीतने के बाद पुलिस ने न्यायालय में विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) पेश कर दिया है। 500 से अधिक पृष्ठों में तैयार किए गए इस विधिक दस्तावेज में घटना की तकनीकी कमियों, चश्मदीदों की गवाहियों और सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघनों को दर्ज करते हुए भवन स्वामी सहित चार मुख्य जिम्मेदारों को नामजद किया गया है।
इन चार चेहरों पर तय हुई जिम्मेदारी, एक आरोपी अब भी कानून की गिरफ्त से दूर
जांच एजेंसी द्वारा अदालत में दाखिल किए गए आरोप पत्र में भवन के स्वामी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, रामकृष्ण उपाध्याय, तुषांक कृष्ण जायसवाल और स्टूडियो का संचालन करने वाले सुरेश कुमार साहू के नाम मुख्य अभियुक्त के तौर पर दर्ज किए गए हैं। इन सभी पर इमारत में घोर लापरवाही बरतने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न करने के गंभीर आरोप हैं। वहीं, इस पूरे प्रकरण से जुड़ा एक अन्य आरोपी सुरेंद्र हादसे के बाद से ही भूमिगत है और पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहा है। विवेचना से जुड़े पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फरार अभियुक्त की धरपकड़ के लिए निरंतर दबिश दी जा रही है और उसके संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी जा रही है।
22 जून का वह भयावह मंजर, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया
गौरतलब है कि 22 जून की तारीख को अलीगंज स्थित इस बहुमंजिला इमारत में अचानक भीषण आग भड़क उठी थी। देखते ही देखते लपटों ने विकराल रूप ले लिया और इमारत के भीतर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का संकरा रास्ता तक मयस्सर नहीं हो सका, जिसके चलते 15 व्यक्तियों की अकाल और दर्दनाक मृत्यु हो गई थी। इस दिल दहला देने वाले हादसे के बाद मची अफरा-तफरी और जनआक्रोश को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री ने त्वरित संज्ञान लिया था और मामले की तह तक जाने के लिए उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिए थे। एसआईटी ने पूर्व में ही अपनी व्यापक पड़ताल पूरी कर शासन को प्राथमिक रिपोर्ट सौंप दी थी।
500 पन्नों में कैद हुई लापरवाही: LDA और दमकल विभाग के ढुलमुल रवैये का भी खुलासा
पुलिस द्वारा न्यायालय में दाखिल की गई 500 से अधिक पन्नों की यह चार्जशीट महज कागजी पुलिंदा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का ठोस संकलन है। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला सच उजागर हुआ कि इमारत में अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) के बुनियादी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई थीं। इसके अतिरिक्त, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और अग्निशमन विभाग के स्तर पर बरती गई शिथिलता व अनदेखी से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण दस्तावेज भी इस आरोप पत्र का हिस्सा बनाए गए हैं। अभियोजन पक्ष का कहना है कि फॉरेंसिक साक्ष्यों, घटनास्थल के विश्लेषण और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत में ऐसा मजबूत पक्ष रखा जाएगा जिससे इस त्रासदी के सभी दोषियों को कठोरतम दंड दिलाया जा सके।





















































