अयोध्या। भगवान श्रीराम की पावन तपोभूमि अयोध्या में शनिवार को 10वें दीपोत्सव का ऐतिहासिक एवं भव्य शुभारंभ हुआ। साकेत महाविद्यालय के परिसर से उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने रामायण कालीन प्रसंगों और विभिन्न प्रांतों की सांस्कृतिक धरोहर को समेटे मनोहारी शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पारंपरिक वाद्यों की झंकार, धोबिया नृत्य की गूंज और भारतीय परिधानों में सजे कलाकारों के अप्रतिम उत्साह ने समूची रामनगरी को एक अद्वितीय सांस्कृतिक संगम में तब्दील कर दिया। शोभायात्रा के आगे ढोल बजाती नारी शक्ति की अगुवाई और मार्ग में श्रद्धालुओं द्वारा की जा रही पुष्पवर्षा ने इस आयोजन को आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण कर दिया।
मथुरा के मोर नृत्य से तेलंगाना के गुसाड़ी तक, दिखी सांस्कृतिक विविधता की झलक
इस ऐतिहासिक दीपोत्सव में समूचे राष्ट्र की समृद्ध लोक परंपराएं एकाकार होती नजर आईं। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा से पधारे 15 सदस्यीय दल ने जब मंच पर मनमोहक मोर नृत्य प्रस्तुत किया, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कलाकारों का कहना था कि यद्यपि वे कान्हा के उपासक हैं, परंतु मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की इस पावन धरा पर अपनी प्रस्तुति देना उनके जीवन का परम सौभाग्य है। इसके साथ ही मथुरा से आए नगाड़ा और बम रसिया दल के प्रतिनिधि लक्ष्मण बेनीवाल ने अपनी आस्था व्यक्त करते हुए बताया कि वे रामलला के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव से लेकर हर दीपोत्सव का अभिन्न हिस्सा बनते रहे हैं। दूसरी ओर, तेलंगाना से आए जनजातीय कलाकारों के 15 सदस्यीय दल ने सिर पर मोरपंखों का भव्य मुकुट धारण कर जब ढोलक की थाप पर पारंपरिक गुसाड़ी नृत्य का सामूहिक प्रदर्शन किया, तो समूचा वातावरण जयकारों से गूंज उठा। वहीं नवोदित महिला कलाकारों ने भी अपनी कला को प्रभु श्रीराम और धर्मनगरी की जनता को समर्पित कर इस पर्व को यादगार बना दिया।
उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री करेंगे प्रभु श्रीराम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक
उत्सव के मुख्य चरण के तहत रामकथा पार्क में एक विराट और गरिमामय समारोह की रूपरेखा तय की गई है। इस विशिष्ट अवसर पर देश के उपराष्ट्रपति डॉ. सीपी राधाकृष्णन, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रभु श्रीराम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह में सहभागिता करेंगे। यह पहला ऐतिहासिक अवसर है जब भारत के उपराष्ट्रपति स्वयं अयोध्या दीपोत्सव के इस अनुपम उत्सव के साक्षी बनने पहुंचे हैं। इस दौरान भारत समेत वैश्विक पटल से पधारीं अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंडलियां वैश्विक रामलीला का सजीव मंचन कर प्रभु के आदर्शों का संदेश प्रसारित करेंगी।
सरयू के 56 घाटों पर सजे 30 लाख दीपक, 35 हजार स्वयंसेवकों ने रचा इतिहास
दीपोत्सव का मुख्य आकर्षण सांझ ढलते ही सरयू नदी के पावन तट पर देखने को मिलेगा। राम की पैड़ी सहित कुल 56 घाटों पर 30 लाख से भी अधिक मिट्टी के दीयों को करीने से सजाकर एक नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस पुनीत कार्य को सिद्ध करने के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के लगभग 35 हजार समर्पित स्वयंसेवकों ने तीन दिनों तक लगातार पसीना बहाया। शनिवार प्रातःकाल से ही स्वयंसेवक दीयों में तेल डालने और बाती लगाने के महती कार्य में जुटे रहे। इस विशाल प्रबंधन को सुचारु बनाए रखने के लिए 900 घाट समन्वयक, 112 घाट प्रभारी और 27 विशेष पर्यवेक्षकों का दायित्वपूर्ण तंत्र धरातल पर मुस्तैद किया गया है।
2147 अर्चकों की सरयू महाआरती और आसमान में 2100 ड्रोन्स का हैरतअंगेज शो
शाम के धुंधलके में जब उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एक साथ लाखों दीप प्रज्वलित होंगे, तो सरयू तट स्वर्णिम आभा से नहा उठेगा। इस आध्यात्मिक दृश्य को और अलौकिक बनाने के लिए 2,147 अर्चक एक स्वर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां सरयू की भव्य महाआरती संपन्न करेंगे। इसके तत्काल बाद नभमंडल में 2,100 अत्याधुनिक ड्रोन्स के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र और रामायण के अमर अध्यायों का सजीव चित्रांकन किया जाएगा। नवनिर्मित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को भी बहुरंगी विद्युत झालरों से दुल्हन की तरह सजाया गया है। वर्तमान में समूची अयोध्या लोककला, रोशनी, रामलीला और भक्ति के महासागर में गोते लगा रही है, जहां देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालु अपनी विरासत पर गर्व की अनुभूति कर रहे हैं।


















































