लखनऊ में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड में 15 लोगों की असामयिक मृत्यु के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में कोचिंग संस्थानों के खिलाफ एक व्यापक जांच अभियान छेड़ दिया है। प्रशासन द्वारा अग्नि सुरक्षा मानकों और भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन को आधार बनाकर कई संस्थानों को सील किया जा रहा है और नोटिस थमाए जा रहे हैं। इस कार्रवाई के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए इसे जनता को परेशान करने की साजिश करार दिया है।
‘सुरक्षा के नाम पर भ्रष्टाचार का नया खेल’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि भाजपा सरकार अब ‘कोचिंग बंदी’ का नया एजेंडा लेकर आई है। यादव ने आरोप लगाया कि सरकार सुरक्षा मानकों के बहाने वास्तव में अपना भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कड़े शब्दों में पूछा, “सुरक्षा मानकों को लेकर हम गंभीर हैं, लेकिन क्या पिछले 10 सालों से सरकार कुंभकर्णी नींद में सो रही थी? आज अचानक सरकार के पास ऐसा कौन सा जादुई स्टाफ आ गया है कि एक ही दिन में पूरे प्रदेश के हजारों कोचिंग सेंटरों को नोटिस थमा दिए गए?” उन्होंने आशंका जताई कि इस छापेमारी के नाम पर करोड़ों रुपए की अवैध वसूली का एक नया सिंडिकेट सक्रिय हो गया है, क्योंकि भाजपाई ‘आपदा में भी संपदा’ तलाशने में माहिर हैं।
छात्रों के भविष्य और करियर पर मंडराता खतरा
कोचिंग संस्थानों को सील करने की कार्रवाई से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थानों को रातों-रात बंद कर देने से पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थानों को सील करने के बजाय, सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए एक निश्चित समयसीमा के साथ सख्त निर्देश दिए जाने चाहिए थे, ताकि किराए के कमरों में रहकर पढ़ाई कर रहे गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों का कोर्स समय पर पूरा हो सके। उन्होंने कहा कि इस मनमानी ‘कोचिंग बंदी’ से न केवल छात्रों का समय बर्बाद होगा, बल्कि उनके परिवार पर आर्थिक बोझ भी और अधिक बढ़ जाएगा।
‘भ्रष्टाचार बंदी’ की मांग
भाजपा सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की समस्याओं का मूल कारण कोचिंग संस्थान नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा अगर सुरक्षा के नाम पर लोगों को प्रताड़ित करने के बजाय अपनी ‘भ्रष्टाचार बंदी’ सुनिश्चित कर ले, तो राज्य की हर समस्या का समाधान स्वतः ही निकल आएगा।” यादव का यह बयान सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब यह मामला केवल सुरक्षा नियमों तक सीमित न रहकर राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है।





















































