प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 17 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह देश भर के भोले-भाले लोगों को डिजिटल अरेस्ट, पार्ट-टाइम नौकरी और आकर्षक निवेश का झांसा देकर करोड़ों रुपये की चपत लगा रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक ₹12.18 करोड़ से अधिक की वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा चुका है। जिला साइबर क्राइम सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दबोचे गए इन आरोपियों के तार देश के कई राज्यों से जुड़े हुए हैं, जो बेहद संगठित तरीके से डिजिटल फ्रॉड के इस काले कारोबार को संचालित कर रहे थे।
यूपी पुलिस के विशेष अभियान के तहत मिली बड़ी सफलता
इस बड़ी कामयाबी का ब्योरा देते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिम) आलोक कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर पूरे प्रदेश में साइबर अपराधियों के खिलाफ एक विशेष खोजी अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रतापगढ़ की जिला साइबर अपराध प्रकोष्ठ (साइबर सेल) को इन संदिग्धों के बारे में पुख्ता इनपुट मिले थे।
पुलिस टीम ने तकनीकी विश्लेषण और सर्विलांस की मदद से ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे दर्जनों फर्जी बैंक खातों और संदिग्ध मोबाइल नंबरों को खंगालना शुरू किया। कड़ियों से कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस आखिरकार इन 17 मास्टरमाइंड्स तक पहुंचने में कामयाब रही, जो पर्दे के पीछे रहकर इस पूरे खेल को नियंत्रित कर रहे थे।
19 राज्यों में फैला था जाल, देश भर में दर्ज हैं 89 शिकायतें
अपर पुलिस अधीक्षक आलोक कुमार ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि जब पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का डेटाबेस नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर मैच किया गया, तो पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। इस गिरोह के खिलाफ देश के 11 या 12 नहीं, बल्कि पूरे 19 अलग-अलग राज्यों में कुल 89 गंभीर शिकायतें पहले से ही दर्ज पाई गईं। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यह नेटवर्क राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था और विभिन्न राज्यों की पुलिस को चकमा देकर लगातार लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहा था।
डिजिटल अरेस्ट से लेकर क्रिप्टोकरेंसी तक: ऐसे फंसाते थे जाल में
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे मुख्य रूप से साइबर अपराध को अंजाम देने वाले बड़े सिंडिकेट्स को सक्रिय बैंक खाते (कमीशन बेसिस पर) और फर्जी आईडी पर लिए गए मोबाइल सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे। इस गिरोह के निशाने पर ऐसे लोग होते थे जिन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए घर बैठे कमाई करने या क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर रातों-रात अमीर बनने का लालच दिया जाता था।
इसके अलावा, हाल के दिनों में बढ़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में भी इस गिरोह के बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ, जहां पीड़ितों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों का डर दिखाकर लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए जाते थे। फिलहाल पुलिस ने सभी 17 आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया है और गिरोह के अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है।





















































