उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का अलीगंज इलाका सोमवार को एक भयावह त्रासदी का गवाह बना। एक बहुमंजिला इमारत में भड़की भीषण आग ने पल भर में 15 जिंदगियों को लील लिया। इस दर्दनाक अग्निकांड में चीख-पुकार, धुएं का गुबार और बेबसी का ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। हादसे के तुरंत बाद 24 लोगों को रेस्क्यू कर अस्पताल ले जाया गया, जिनमें से 15 को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। दिल दहला देने वाली इस घटना में कई परिवारों के चिराग बुझ गए और पीछे रह गईं तो बस सिसकियां और सिस्टम की लापरवाही पर अनगिनत सवाल।
मौत से पहले बेटे की वो आखिरी पुकार
इस खौफनाक हादसे का सबसे रुला देने वाला पहलू 23 वर्षीय सुखमनी सिंह की आखिरी फोन कॉल रही। मौत के मुहाने पर खड़े सुखमनी ने आग की लपटों से घिरे होने के बीच अपने पिता को फोन मिलाया था। उसकी कांपती और घबराई हुई आवाज में बस एक ही दर्दनाक गुहार थी:
“पापा, यहां आग लग गई है, मुझे बचा लीजिए।”
पिता कुछ समझ पाते या बेटे की मदद के लिए दौड़ते, उससे पहले ही दूसरी तरफ से संपर्क हमेशा के लिए टूट गया। जब तक रेस्क्यू टीम उस फ्लोर तक पहुंच पाती, बहुत देर हो चुकी थी। एक हंसता-खेलता नौजवान धुएं और आग की भेंट चढ़ चुका था।
ग्राउंड फ्लोर से भड़की आग, जान बचाने को इमारत से कूदे लोग
चश्मदीदों ने जो खौफनाक मंजर बयां किया है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग लगने की घटना ग्राउंड फ्लोर पर स्थित पालतू जानवरों (पेट शॉप्स) की दुकानों से शुरू हुई थी। आग ने इतनी तेजी से विकराल रूप धारण किया कि चंद मिनटों में ही पूरा भवन घने काले धुएं और आग की लपटों से घिर गया। ऊपर की मंजिलों पर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं मिला। जान बचाने की जद्दोजहद में घबराए हुए कुछ लोगों ने ऊपरी मंजिलों से ही नीचे छलांग लगा दी। मौके पर मची अफरा-तफरी के बीच लोग अपनों को तलाशते नजर आए।
‘समय पर मदद मिलती तो बच जाता मेरा लाल’
इस अग्निकांड ने कई होनहार युवाओं को निगल लिया। हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य श्रीवास्तव का परिवार गहरे सदमे में है। आदित्य की रोती-बिलखती मां ने राहत और बचाव कार्य में देरी का सीधा आरोप लगाया है। उनका दर्द छलक पड़ा जब उन्होंने कहा कि उनका बेटा काफी देर तक धुएं और आग के बीच फंसा रहा, लेकिन समय पर मदद नहीं पहुंची। अगर बचाव दल तत्परता दिखाता, तो शायद कई जानें बचाई जा सकती थीं। आदित्य के दोस्तों ने उसे एक बेहद मेधावी और परिश्रमी युवक बताया, जिसके यूं अचानक चले जाने से हर कोई स्तब्ध है।
छिन गया लकवाग्रस्त पिता और बेबस मां का इकलौता सहारा
त्रासदी का एक और मार्मिक चेहरा अब्दुल रहमान की मौत है। अब्दुल अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला शख्स था। उसके घर की स्थिति बेहद नाजुक है; पिता लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हैं और मां एक साधारण गृहिणी हैं। दोस्तों के मुताबिक, अब्दुल को कुछ ही महीने पहले एक अच्छी नौकरी मिली थी, जिससे परिवार की आर्थिक परेशानियां दूर होने लगी थीं। वह पूरी शिद्दत से अपने परिवार की जिम्मेदारियां उठा रहा था। अब उसकी बेवक़्त मौत ने इस परिवार को न सिर्फ गहरे शोक में धकेल दिया है, बल्कि उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर आर्थिक संकट भी खड़ा कर दिया है।
लापरवाही पर कड़ा एक्शन: चार अफसर सस्पेंड, SIT करेगी जांच
इतने बड़े हादसे के बाद अब शासन-प्रशासन हरकत में आया है। प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि जिस इमारत में यह अग्निकांड हुआ, उसे कई साल पहले ही सुरक्षा मानकों के आधार पर ‘असुरक्षित’ घोषित किया जा चुका था। बावजूद इसके, वहां व्यावसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है।
- अधिकारियों पर गाज: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), बिजली विभाग और अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड) के चार लापरवाह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
- एसआईटी गठित: उत्तर प्रदेश सरकार ने हादसे की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
- दर्ज हुई एफआईआर: स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब यह पता लगाया जा रहा है कि सुरक्षा मानकों को ताक पर रखने का असली जिम्मेदार कौन है और यह आग किन कारणों से लगी।





















































