बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के इज्जतनगर स्थित केंद्रीय कारागार (सेंट्रल जेल) से सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां सोमवार दोपहर को बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच से उम्रकैद की सजा काट रहा एक शातिर कैदी जेल प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गया। इस गंभीर सुरक्षा चूक की सूचना मिलते ही जेल महकमे से लेकर पुलिस और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन ने प्रथम दृष्टया बड़ी लापरवाही मानते हुए जेलर और डिप्टी जेलर की निगरानी में तैनात 5 जेल वार्डन और 2 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों सहित कुल 7 कर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। इस बड़ी घटना ने जेल की अंदरूनी सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खेती के काम के बहाने मुख्य चहारदीवारी से बाहर आया और हो गया रफूचक्कर
जेल के आधिकारिक सूत्रों से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, फरार हुए कैदी की पहचान दिनेश के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के ही अमरोहा जिले का मूल निवासी है। दिनेश एक संगीन मामले में कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा भुगत रहा था और पिछले 6 सालों से बरेली की इसी सेंट्रल जेल में बंद था। सोमवार को जेल के नियमन के तहत उसे कृषि कार्य (खेत में काम) करने के लिए जेल परिसर की मुख्य चहारदीवारी से बाहर बने कृषि क्षेत्र में ले जाया गया था। वहां लगभग 10 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद, दिनेश ने सुरक्षा घेरे में मौजूद खामियों का फायदा उठाया। वह ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को चकमा देकर पलक झपकते ही वहां से रफूचक्कर हो गया। काफी देर तक जब वह नजर नहीं आया, तब जाकर सुरक्षाकर्मियों को उसके भागने का एहसास हुआ।
डीएम और एसएसपी ने संभाला मोर्चा, मौके पर पहुंचकर शुरू की जांच
जैसे ही उम्रकैदी के सेंट्रल जेल से दीवार लांघकर भागने की खबर फैली, वैसे ही जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी अलर्ट हो गए। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए बरेली के जिलाधिकारी (DM) अविनाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अनुराग आर्य भारी पुलिस बल के साथ तुरंत केंद्रीय कारागार पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और जेल के अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की। एसएसपी ने जेल परिसर में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से लंबी पूछताछ की और घटना के समय मौजूद सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की गहनता से जांच करने के कड़े निर्देश दिए। अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की मिलीभगत या घोर लापरवाही के बिना इतनी कड़ी सुरक्षा से भागना मुमकिन नहीं है।
वरिष्ठ अधिकारियों का कड़ा रुख: “सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी कर्मचारियों के खिलाफ केवल निलंबन ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर विभागीय जांच के बाद सख्त कानूनी मुकदमा भी चलाया जाएगा।”
पांच जेल वार्डन समेत सात सुरक्षाकर्मियों पर गिरी निलंबन की गाज
इस बेहद संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए बरेली केंद्रीय कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक अविनाश ने बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने ड्यूटी के प्रति घोर लापरवाही और अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन न करने के आरोप में प्रथम दृष्टया जिम्मेदार 7 कर्मचारियों को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। निलंबित होने वाले कर्मचारियों में जेल वार्डन विशंभर सिंह, अर्जुन प्रसाद, गेंदनलाल, मुकेश कुमार और मोहित कुमार शामिल हैं। इनके साथ ही ड्यूटी पर तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विजय कुमार और यशपाल के खिलाफ भी निलंबन की सख्त कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही, जेल मुख्यालय के निर्देश पर पूरे मामले की एक उच्च स्तरीय विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि इस सुरक्षा चूक की क्रोनोलॉजी का पूरी तरह पता लगाया जा सके।
फरार दिनेश की तलाश में एसटीएफ और सर्विलांस एक्टिव, पड़ोसी जिलों में अलर्ट
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने बताया कि फरार उम्रकैदी दिनेश की दोबारा गिरफ्तारी के लिए बरेली पुलिस की कई विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं। पुलिस और स्वाट (SWAT) की टीमें सर्विलांस सेल, स्थानीय मुखबिर नेटवर्क और आधुनिक तकनीकी माध्यमों की मदद से फरार कैदी के हर संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। दिनेश के गृह जनपद अमरोहा और उसके रिश्तेदारों के घरों पर भी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर बरेली के आसपास के सभी सीमावर्ती जिलों की पुलिस को भी हाई अलर्ट पर रख दिया गया है और रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों पर चेकिंग तेज कर दी गई है। पुलिस ने दावा किया है कि बहुत जल्द आरोपी को दोबारा सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।





















































