उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में अवैध अतिक्रमण और सरकारी जमीनों पर भू-माफियाओं के खिलाफ योगी सरकार का सख्त अभियान लगातार जारी है। हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बंजर भूमि पर बने एक मदरसे और 4 पक्की दुकानों को जमींदोज कर दिया है। इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई से पूरे इलाके के अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है और अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।
सालों पुराने अवैध साम्राज्य पर चला प्रशासन का पीला पंजा
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला बहराइच जिले के हुजूरपुर थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहाँ के ग्राम पंचायत सिंहपुर के अंतर्गत आने वाले घिसियौना गांव में स्थित गाटा संख्या 495 की करोड़ों रुपये मूल्य की ग्राम सभा की बंजर भूमि पर कुछ लोगों ने सालों से अवैध रूप से पक्का निर्माण कर रखा था। शुक्रवार को जिला प्रशासन ने इस जमीन पर बने अवैध ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त कर जमीन को अपने कब्जे में ले लिया।
हाई कोर्ट की चौखट तक पहुंचा था बंजर भूमि का यह विवाद
इस अवैध निर्माण के खिलाफ गांव के ही रहने वाले रहीस अहमद ने हार न मानते हुए माननीय उच्च न्यायालय (High Court) में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन को जमीन की पैमाइश कर तत्काल अवैध कब्जा हटाने का सख्त निर्देश दिया था।
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में तहसीलदार पयागपुर की अदालत में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 67 के तहत मुकदमे की लंबी सुनवाई चली। कोर्ट ने खतौनी, खसरा, और क्षेत्रीय लेखपाल की स्थलीय जांच रिपोर्ट के साथ-साथ अन्य राजस्व अभिलेखों का गहनता से अवलोकन किया। साक्ष्यों के आधार पर यह पूरी तरह सिद्ध हो गया कि यह जमीन कागजात में ग्राम सभा के बंजर खाते में दर्ज है और इस पर किया गया निर्माण पूरी तरह से अनधिकृत और गैरकानूनी है।
साजिश के आरोपों को कोर्ट ने किया खारिज, बेदखली का रास्ता साफ
सुनवाई के दौरान अतिक्रमणकारी पक्ष ने खुद को बचाने का हरसंभव प्रयास किया। विपक्षी पक्ष ने कोर्ट के सामने दलील दी कि लेखपाल की रिपोर्ट साजिशन तैयार की गई है और बिना किसी स्थलीय पैमाइश के उन पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, जब राजस्व विभाग द्वारा दोबारा गहन जांच की गई और क्षेत्रीय लेखपाल की प्रतिपरीक्षा (Cross-examination) हुई, तो अतिक्रमण की बात सौ फीसदी सच साबित हुई।
तहसीलदार न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में विपक्षी पक्ष की सभी आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी वकील, शकील, साहिल, जावेद, नावेद, सईद अहमद, रईस अहमद और रियाज अहमद समेत अन्य लोगों के खिलाफ बेदखली, भारी क्षतिपूर्ति और इस पूरी ध्वस्तीकरण प्रक्रिया में आने वाले खर्च (निष्पादन व्यय) को वसूलने का अंतिम आदेश पारित कर दिया।
जेसीबी की गड़गड़ाहट से कांपा घिसियौना गांव, ये निर्माण हुए जमींदोज
शुक्रवार की सुबह जैसे ही उपजिलाधिकारी (SDM) अश्वनी कुमार पांडेय और तहसीलदार अंबिका चौधरी के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम जेसीबी मशीनों के साथ गांव में दाखिल हुई, वहां हड़कंप मच गया। किसी भी संभावित विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए हुजूरपुर के थानाध्यक्ष शमशेर बहादुर सिंह भारी पुलिस बल और पीएसी के जवानों के साथ मुस्तैद रहे।
प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। इस दौरान साहिल, शकील, नावेद और जावेद (पुत्रगण सगीर अहमद) द्वारा अवैध रूप से निर्मित की गईं 4 आलीशान पक्की दुकानों को ढहा दिया गया। इसके साथ ही, सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए एक मदरसा भवन, उसके सामने रखे विशाल टीनशेड और कमर्शियल ढाबली को भी पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया।
सीमांकन के बाद लगाया गया चेतावनी बोर्ड, आगे भी जारी रहेगा एक्शन
ध्वस्तीकरण की इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के बाद राजस्व विभाग की तकनीकी टीम ने आधुनिक उपकरणों से भूमि की दोबारा सटीक पैमाइश की और उसका सीमांकन (Demarcation) पूरा किया। प्रशासन ने अब इस पूरी जमीन को आधिकारिक तौर पर सरकारी संपत्ति और कब्जामुक्त घोषित कर दिया है। भविष्य में यहां दोबारा कोई भू-माफिया सिर न उठा सके, इसके लिए प्रशासन द्वारा वहां पर सरकारी चेतावनी बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस बोर्ड पर स्पष्ट लिखा है कि सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश करने वालों पर सीधे जेल भेजने की कार्रवाई होगी।
एसडीएम का बड़ा बयान: अपील वाले मामलों को छोड़कर कहीं नहीं बख्शा जाएगा कब्जा
इस पूरे अभियान को लेकर मीडिया से बात करते हुए उपजिलाधिकारी (SDM) अश्वनी कुमार पांडेय ने साफ और कड़े शब्दों में प्रशासन का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “यह पूरी कार्रवाई माननीय उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत और तहसीलदार न्यायालय से पारित बेदखली आदेश के अनुपालन में की गई है।”
एसडीएम ने आगे एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू की जानकारी देते हुए कहा कि कुछ अतिक्रमणकारियों ने इस बेदखली आदेश के खिलाफ जिलाधिकारी (DM) की अदालत में अपील दायर की है। कानून का सम्मान करते हुए, जिन चुनिंदा मामलों में अभी स्थगन (Stay) या आपत्तियां जिला मजिस्ट्रेट के न्यायालय में लंबित हैं, उन पर फिलहाल बुलडोजर नहीं चलाया गया है। जैसे ही वहां से मामलों का निस्तारण होगा, आदेश के अनुसार आगे की सख्त ध्वस्तीकरण कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बहराइच में हुई यह बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों को अपनी निजी जागीर समझकर उन पर अवैध निर्माण कर लेते हैं। योगी सरकार का यह बुलडोजर एक्शन साफ संदेश देता है कि कानून की नजर में कोई भी अवैध ढांचा, चाहे वह धार्मिक हो या व्यावसायिक, सुरक्षित नहीं है। सरकारी बंजर भूमि का उपयोग जनहित के कार्यों और ग्रामीण विकास के लिए होना चाहिए, न कि निजी मुनाफे के लिए। उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद राज्य के अन्य हिस्सों में भी भू-माफियाओं के खिलाफ इसी तरह की निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई देखने को मिलेगी।



















































