उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल के ढहने से हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। 6 निर्दोष श्रमिकों की मौत के बाद जहां पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है, वहीं शासन के निर्देश पर कार्यदायी संस्था के मालिक, ठेकेदार और जिम्मेदार इंजीनियरों पर गाज गिरी है। इस प्रशासनिक कार्रवाई ने सरकारी निर्माण कार्यों में बरती जा रही गंभीर लापरवाही पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
तड़के 3 बजे चीखों में बदली आंधी की आहट
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर लालपुरा थाना क्षेत्र में शुक्रवार का तड़का काल बनकर आया। परसानी और कंदौर गांवों के बीच बेतवा नदी पर लंबे समय से एक बड़े पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे जब पूरा इलाका गहरी नींद में था, तभी अचानक मौसम बदला और तेज आंधी चलने लगी। इसी अंधड़ के बीच निर्माणाधीन पुल का एक विशालकाय कंक्रीट स्लैब भरभराकर नीचे आ गिरा।
इस स्लैब के ठीक नीचे अस्थायी शेड बनाकर सो रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। भारी-भरकम मलबे के नीचे दबने से चीख-पुकार मच गई। स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस की मदद से जब तक मलबे को हटाया जाता, तब तक 6 मजदूरों की सांसें हमेशा के लिए थम चुकी थीं। वहीं 3 मजदूरों को गंभीर हालत में मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
मलबे से निकाली गईं लाशें, अपनों का रो-रोकर बुरा हाल
पुलिस प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे सभी शवों को बाहर निकाला। मृतकों की पहचान लोकेंद्र (22 वर्ष), कुलदीप निषाद (19 वर्ष), सावंत यादव (28 वर्ष), सभाजीत (30 वर्ष), पुष्पेंद्र चौहान (34 वर्ष) और राजेश पाल (42 वर्ष) के रूप में हुई है। मरने वाले अधिकांश श्रमिक युवा थे, जो अपने परिवारों के इकलौते कमाऊ सदस्य थे।
इस हादसे में अवधेश निषाद, कल्लू यादव और राजेश निषाद गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। जैसे ही मृतकों के शव उनके पैतृक गांवों में पहुंचे, परिजनों में कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजनों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे।
असिस्टेंट इंजीनियर सस्पेंड, मालिक और ठेकेदार पर केस दर्ज
इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। शनिवार को पुलिस सूत्रों ने बताया कि राज्य सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक (Deputy Project Manager) दिलीप कुमार की तहरीर पर कुरारा थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। यह FIR कार्यदायी संस्था के मालिक पवन प्रताप सिंह और मुख्य ठेकेदार नितीश कुमार के खिलाफ दर्ज की गई है। इन पर सरकारी काम में मानकों की अनदेखी करने, लापरवाही बरतने और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखने का संगीन आरोप है।
लालपुरा और कुरारा थाना प्रभारी प्रिंस दीक्षित ने बताया कि पुलिस ने आईपीसी की सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर मामले की सघन विवेचना शुरू कर दी है। इससे पहले, शुक्रवार को ही प्रारंभिक जांच के आधार पर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक अभियंता (Assistant Engineer) गजेंद्र चौधरी को निलंबित कर दिया था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताया दुख, मुआवजे का ऐलान
हमीरपुर के इस दर्दनाक हादसे पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने के लिए तत्काल आर्थिक सहायता की घोषणा की।
शासन की ओर से मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और इस हादसे में घायल हुए प्रत्येक श्रमिक को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने जिला मजिस्ट्रेट को घायलों के समुचित और मुफ्त इलाज के भी कड़े निर्देश जारी किए हैं।
स्ट्रक्चरल ऑडिट और सुरक्षा मानकों पर उठते सुलगते सवाल
इस हादसे ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उनके स्ट्रक्चरल ऑडिट पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लगा दिया है। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि महज एक आंधी के झोंके से पुल का इतना भारी स्लैब गिर जाना सीधे तौर पर निर्माण सामग्री में मिलावट या इंजीनियरिंग की बड़ी खामी को दर्शाता है।
क्या कंक्रीट को सूखने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था? क्या स्लैब को सपोर्ट देने वाली शटरिंग मजबूत थी? इन सभी पहलुओं की जांच के लिए उच्च स्तरीय तकनीकी टीम गठित की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसे जानलेवा हादसों को रोका जा सके।
हमीरपुर का यह पुल हादसा सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा या महज एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र और ठेकेदारों के गठजोड़ की लापरवाही का नतीजा है। जिन मजदूरों के पसीने से इस बुनियादी ढांचे की नींव रखी जा रही थी, वही इसके नीचे दफन हो गए। एफआईआर और निलंबन की यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन असली न्याय तभी होगा जब दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले ताकि किसी अन्य निर्माण स्थल पर फिर कभी किसी गरीब मजदूर को अपनी जान न गंवानी पड़े।



















































