भारतीय सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने 19 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का भव्य लोकार्पण किया। यह वाटिका केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारतीय नौसेना की वीरता और राष्ट्रवाद का एक जीवंत संग्रहालय है।
सुरक्षा ही विकास की आधारशिला: सीएम योगी का बड़ा संदेश
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर टिकी होती है। सीएम योगी ने स्पष्ट किया, “दुनिया में शांति और सम्मान उसी देश को मिलता है, जो अपनी सीमाओं और संप्रभुता के प्रति सतर्क और शक्तिशाली हो।”
उन्होंने पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान दंगों, कर्फ्यू और माफिया राज के कारण नकारात्मक थी, जिसने प्रदेश में निवेश और विकास की रफ्तार को रोक दिया था। आज के सुरक्षित वातावरण ने उत्तर प्रदेश को भारत की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की दौड़ में शामिल कर दिया है। उन्होंने जोर दिया कि जब सीमाओं पर सैनिक अपनी जान जोखिम में डालकर देश की रक्षा करते हैं, तो नागरिकों का भी यह नैतिक कर्तव्य है कि वे सैन्य बलों के प्रति असीम सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखें।
नौसेना का इतिहास और गोमती का अनूठा संगम
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि यह संग्रहालय किस प्रकार भारतीय नौसेना की विरासत को आम जनमानस तक ले जाएगा। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश समुद्र से भले ही दूर हो, लेकिन यह राज्य की नदियां अंततः समुद्र का ही हिस्सा हैं। आईएनएस गोमती, जिसने 34 वर्षों तक राष्ट्र की समुद्री सीमाओं की रक्षा की, अब लखनऊ में आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।”
इस वाटिका में आईएनएस गोमती के सेवानिवृत्त होने के बाद उसके महत्वपूर्ण अंगों—जैसे कि उसका मुख्य मस्तूल, तोपें, प्रोपेलर और जिफ-101 लॉन्चर—को सुरक्षित रखा गया है। यह पर्यटकों को न केवल भारतीय नौसेना के तकनीक के बारे में बताएगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि कैसे भारतीय नौसेना स्वदेशी तकनीक के दम पर विश्व की अग्रणी सेनाओं में से एक बन चुकी है।
यूपी डिफेंस कॉरिडोर और नई सैन्य चेतना
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस दौरान भारत की रक्षा क्षमताओं पर गर्व व्यक्त करते हुए ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल का उदाहरण दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि आने वाले महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में भारतीय नौसेना की प्रदर्शनियां लगाई जानी चाहिए ताकि वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य ताकत को पहचान मिले।
वहीं, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि लखनऊ 1857 से लेकर आधुनिक युग तक बलिदान और शौर्य का केंद्र रहा है। यह वाटिका राजधानी की इस महान विरासत में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ती है। संग्रहालय में यूपी डिफेंस कॉरिडोर की झलक भी देखने को मिलेगी, जो यह दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश किस प्रकार देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दे रहा है।
युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र
नौसेना शौर्य वाटिका का उद्देश्य केवल पुरानी तकनीक का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह युवाओं को यह समझाने का माध्यम है कि एक सैन्य जीवन कैसा होता है। यहाँ की तकनीक और युद्धपोत के अवशेष छात्रों और युवाओं को प्रेरित करेंगे कि वे भी देश की सेवा के लिए आगे आएं। 28 मई 2022 को डीकमिशन किए गए आईएनएस गोमती के ये अंश अब गोमती नदी के किनारे एक गौरवशाली गाथा सुना रहे हैं।
यह स्थल अब लखनऊ आने वाले हर सैलानी के लिए एक ‘मस्ट विजिट’ डेस्टिनेशन बन गया है, जो राष्ट्रभक्ति की अलख जगाने में सक्षम है।
लखनऊ की यह ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ यह सिद्ध करती है कि उत्तर प्रदेश का विकास अब केवल सड़कों या इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय गौरव और सामरिक सक्षमता के नए सोपानों को छू रहा है। गोमती के तट पर आईएनएस गोमती का होना यह सुनिश्चित करेगा कि आने वाली पीढ़ियां सदैव याद रखें कि भारत की सुरक्षा और गौरव की रक्षा के लिए हमारे वीरों ने समुद्र की लहरों से लेकर पहाड़ों की ऊंचाई तक किस प्रकार अतुलनीय योगदान दिया है।



















































