उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक बेहद विचलित करने वाली और हृदय विदारक खबर सामने आई है। यहां बेतवा नदी पर बन रहे एक अहम पुल का बड़ा हिस्सा भीषण तूफान की चपेट में आकर ताश के पत्तों की तरह ढह गया, जिसके मलबे में दबकर 6 बेगुनाह मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई है। यह हादसा उस वक्त हुआ जब मजदूर दिनभर की थकान मिटाने के लिए गहरी नींद में सो रहे थे; फिलहाल मौके पर चीख-पुकार मची है और कई अन्य लोगों की जान बचाने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
- हादसे का कारण: भीषण तूफान के चलते बेतवा नदी पर बन रहे पुल का भारी-भरकम स्लैब गिरा।
- जनहानि: मलबे में दबकर बांदा और हमीरपुर के 6 मजदूरों की मौत, 3 लोग अब भी खंभे पर फंसे।
- राहत कार्य: सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर SDRF और स्थानीय पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन तेज।
- समय और स्थान: लालपुर क्षेत्र के मोराकंदर और कुरारा की मवाईजार को जोड़ने वाले पुल पर 28-29 मई की मध्यरात्रि 2 बजे हुआ हादसा।
खौफनाक रात: जब नींद में ही काल के गाल में समा गए मजदूर
हमीरपुर जिले के लिए 28 और 29 मई की दरम्यानी रात एक ऐसा भयानक मंजर लेकर आई, जिसे यहां के लोग शायद ही कभी भुला पाएं। लालपुर थाना क्षेत्र के मोराकंदर और कुरारा की मवाईजार को जोड़ने के लिए बेतवा नदी पर एक महत्वपूर्ण पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। साइट पर काम करने वाले मजदूर दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद पुल के नीचे ही सो रहे थे। रात करीब 2 बजे अचानक मौसम ने करवट ली और एक भीषण तूफान ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। हवाओं का वेग इतना प्रचंड था कि निर्माणाधीन पुल का एक भारी-भरकम स्लैब सीधे नीचे सो रहे मजदूरों पर आ गिरा। इस खौफनाक हादसे ने सोते हुए मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं दिया और 6 जिंदगियां हमेशा के लिए खामोश हो गईं।
जिंदगी बचाने की जद्दोजहद: SDRF और पुलिस का महा-अभियान
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्लैब गिरने के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। हमीरपुर के एएसपी अरविंद कुमार वर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि रात करीब 2 बजे पुलिस को इस खौफनाक हादसे की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन के आला अधिकारी और रेस्क्यू टीमें तत्काल प्रभाव से घटनास्थल पर पहुंच गईं।
एएसपी वर्मा के मुताबिक, “फिलहाल 3 लोग एक खंभे पर फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हमारी टीम और एसडीआरएफ (SDRF) लगातार अपनी जान जोखिम में डालकर प्रयास कर रही है। मलबे के नीचे 6 लोगों के दबे होने की पुख्ता सूचना है, जिनमें से 5 लोगों की शिनाख्त कर ली गई है। भारी-भरकम स्लैब को हटाकर उन्हें बाहर निकालने का काम तेजी से चल रहा है।” मृतकों में मुख्य रूप से बांदा और हमीरपुर जनपद के ही गरीब श्रमिक शामिल बताए जा रहे हैं, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए यहां मजदूरी कर रहे थे।
सीएम योगी ने लिया कड़ा संज्ञान, रेस्क्यू में झोंकी पूरी ताकत
इस दर्दनाक हादसे की गूंज लखनऊ तक पहुंची और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत इसका कड़ा संज्ञान लिया। सीएम योगी ने हादसे में हुई जनहानि पर गहरा दुःख और शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने बिना कोई समय गंवाए प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने और राहत-बचाव कार्य को युद्ध स्तर पर चलाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “जनपद हमीरपुर में बेतवा नदी पर एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। जिला प्रशासन को SDRF के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य तेजी से संचालित करने हेतु निर्देश दिए हैं।” इसके साथ ही सीएम ने अधिकारियों को पीड़ित परिवारों से लगातार संवाद बनाए रखने और उन्हें हर संभव आर्थिक और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करवाने का भी आदेश दिया है।
विकास की उम्मीदों को लगा बड़ा झटका
यह निर्माणाधीन पुल स्थानीय लोगों के लिए महज एक कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि विकास की एक बड़ी उम्मीद था। जानकारी के अनुसार, इस पुल का निर्माण राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद के विशेष प्रयासों और अथक मेहनत के बाद शुरू कराया गया था। इसके बनने से मोराकंदर और मवाईजार के बीच की दूरी कम होने वाली थी और लाखों लोगों का सफर आसान होने वाला था। लेकिन कुदरत के इस कहर ने न सिर्फ विकास की इस रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है, बल्कि उन गरीब परिवारों को भी जीवन भर का गहरा जख्म दे दिया है, जिनके अपने इस हादसे का शिकार हो गए।
हमीरपुर का यह हादसा विकास कार्यों के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की हमारी तैयारियों पर एक गंभीर सवाल भी खड़ा करता है। फिलहाल प्रशासन की पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों की जान बचाना और घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराना है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस भीषण त्रासदी के बाद निर्माण स्थलों पर काम करने वाले उन मजदूरों की सुरक्षा के लिए और अधिक कड़े कदम उठाए जाएंगे, जो देश के विकास की नींव अपने पसीने से रखते हैं। प्रशासन और SDRF की टीमें लगातार मौके पर डटी हुई हैं और हर एक जिंदगी को बचाने की आखिरी कोशिश की जा रही है।





















































