पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर सबसे बड़ा डर यही है कि यह इंसानों की नौकरियां खा जाएगा। लेकिन अब खुद ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) ने इस डर को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ऑल्टमैन ने मंच से यह स्वीकार किया है कि एआई से व्हाइट-कॉलर जॉब्स जाने का उनका शुरुआती अनुमान पूरी तरह गलत और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था।
- सैम ऑल्टमैन का बड़ा कबूलनामा: OpenAI के सीईओ ने सार्वजनिक रूप से माना कि AI से नौकरियां छिनने का उनका अपना डर और अनुमान गलत था।
- व्हाइट-कॉलर जॉब्स सुरक्षित: शुरुआती खौफ के विपरीत, ऑफिस में काम करने वाले (एंट्री-लेवल) कर्मचारियों पर एआई का नकारात्मक प्रभाव बेहद कम रहा है।
- इंसानी संपर्क अपूरणीय: ऑल्टमैन ने स्पष्ट किया कि मशीनें या एआई टूल कभी भी कार्यस्थल पर इंसानी भावनाओं, समझ और संपर्क की जगह नहीं ले सकते।
- बड़ी कंपनियों का रुख: अमेजन, एचएसबीसी जैसी वैश्विक कंपनियां AI को अपना रही हैं, लेकिन यह इंसानों को पूरी तरह रिप्लेस करने के बजाय मददगार साबित हो रहा है।
ChatGPT के लॉन्च के बाद फैला था खौफ, अब मिली राहत
नवंबर 2022 में जब ओपनएआई (OpenAI) ने अपना बहुचर्चित टूल चैटजीपीटी (ChatGPT) लॉन्च किया था, तब पूरी दुनिया के कॉर्पोरेट सेक्टर में हड़कंप मच गया था। कोडिंग से लेकर कंटेंट राइटिंग और डेटा एंट्री तक, यह माना जा रहा था कि एआई इंसानों को रातों-रात बेरोजगार कर देगा। लेकिन लगभग डेढ़ साल बाद, तस्वीर बिल्कुल अलग है। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (CBA) द्वारा आयोजित एक बड़े टेक सम्मेलन में बोलते हुए सैम ऑल्टमैन ने इस मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई से नौकरियां खत्म होने का कोई वास्तविक खतरा नहीं है।
‘मुझे खुशी है कि मेरा अनुमान गलत साबित हुआ’
सीबीए के चीफ एग्जीक्यूटिव मैट कॉमिन के साथ एक विशेष बातचीत के दौरान सैम ऑल्टमैन ने अपनी ही पुरानी भविष्यवाणियों पर बात की। ऑल्टमैन ने बेहद ईमानदारी से कहा, “मुझे यह जानकर बेहद खुशी हो रही है कि नौकरियों को लेकर मेरा अनुमान गलत था।” उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा, “मुझे लगा था कि प्रवेश स्तर (Entry-Level) की व्हाइट-कॉलर नौकरियों के खत्म होने का असर अब तक जितना हुआ है, उससे कहीं ज्यादा भयानक होगा। लेकिन वास्तविकता में इसका रोजगार पर प्रभाव अब तक हमारे अनुमानों से काफी कम और सामान्य रहा है।”
तकनीक की रफ्तार सही आंकी, पर सामाजिक प्रभाव में हुई चूक
ऑल्टमैन ने एक बेहद दिलचस्प पहलू पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार, OpenAI की टीम ने इस बात का तो बिल्कुल सटीक अनुमान लगा लिया था कि एआई तकनीक कितनी तेजी से विकसित होगी, लेकिन वे इसके सामाजिक और आर्थिक परिणामों को समझने में ‘काफी गलत’ साबित हुए। शुरुआत में एआई की क्षमता को देखकर जो डर पैदा हुआ था, उसी कारण लोगों ने नौकरियों के खत्म होने की आशंकाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था। आज एआई एक ‘रिप्लेसमेंट’ के बजाय कर्मचारियों के लिए एक ‘को-पायलट’ या मददगार टूल बनकर उभरा है।
वैश्विक कंपनियों में ऑटोमेशन का असर और इंसानी अहमियत
सैम ऑल्टमैन की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब कॉर्पोरेट जगत बड़े बदलावों से गुजर रहा है। एचएसबीसी (HSBC), अमेजन (Amazon), स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered) और कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया जैसी कई दिग्गज वैश्विक कंपनियों ने हाल ही में स्वीकार किया है कि वे अपने संगठनों में कुछ चुनिंदा पदों को एआई-आधारित उपकरणों और स्वचालन (Automation) के जरिए नया रूप दे रहे हैं। हालांकि, इन बदलावों के बावजूद इंसानों को पूरी तरह सिस्टम से बाहर नहीं किया जा सका है। ऑल्टमैन ने जोर देकर कहा कि उन्हें अब यह गहरा एहसास हो रहा है कि ‘मानवीय संपर्क’ और ‘इंसानी समझ’ कई नौकरियों का एक ऐसा अनिवार्य हिस्सा है, जिसकी मशीनें कभी आसानी से नकल नहीं कर सकतीं।
सैम ऑल्टमैन का निजी अनुभव: जब AI से होने लगी ऊब
इंसानी संपर्क के महत्व को समझाने के लिए ऑल्टमैन ने अपनी निजी जिंदगी का एक बेहद रोचक उदाहरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने अपने स्लैक (Slack) और ईमेल संदेशों के जवाब देने के लिए पूरी तरह से एआई द्वारा उत्पन्न उत्तरों (AI Generated Replies) का उपयोग करना शुरू कर दिया था। लेकिन जल्द ही उन्हें इसमें ‘इंसानी स्पर्श’ की कमी महसूस होने लगी। एआई के रोबोटिक जवाबों से ऊबकर, अंततः उन्होंने खुद अपने हाथों से संदेश टाइप कर उत्तर देना फिर से शुरू कर दिया।
सैम ऑल्टमैन का यह बयान दुनिया भर के लाखों युवाओं और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। यह इस बात की तस्दीक करता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक शक्तिशाली टूल जरूर है, जो हमारी कार्यक्षमता और उत्पादकता को कई गुना बढ़ा सकता है, लेकिन यह इंसानी रचनात्मकता, विवेक और आपसी संपर्क का विकल्प कभी नहीं बन सकता। भविष्य में वही लोग सफल होंगे जो एआई से डरने के बजाय, उसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना सीख जाएंगे।

















































