उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सिस्टम को शर्मसार कर देने वाला एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां राजकीय निर्माण निगम के एक भ्रष्ट जूनियर इंजीनियर (JE) को 25 लाख रुपये का रुका हुआ भुगतान पास करने के एवज में एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक संगठन (ACO) ने एक ऐसा अचूक जाल बिछाया कि घूस की रकम वसूलने वाले ड्राइवर के साथ-साथ भागने की कोशिश कर रहा जेई भी रडार से बच नहीं सका।
- बड़ी गिरफ्तारी: मेरठ के राजकीय निर्माण निगम में 1 लाख रुपये की घूस लेते जेई योगेंद्र सिंह और एक ड्राइवर गिरफ्तार।
- क्या था विवाद: बागपत निवासी ठेकेदार सत्येंद्र सिंह तोमर का 25 लाख रुपये का भुगतान साल 2023 से जानबूझकर लटकाया गया था।
- शातिर चाल: खुद को बचाने के लिए चालाक जेई ने सीधे पैसे लेने के बजाय प्रोजेक्ट मैनेजर के ड्राइवर को आगे कर दिया था।
- रंगे हाथ पकड़े गए: एंटी करप्शन (ACO) टीम ने केमिकल लगे नोटों के साथ ट्रैप बिछाया और दोनों को मौके पर ही दबोच लिया।
- दफ्तर में हड़कंप: मेडिकल थाना क्षेत्र के राजीवपुरम स्थित कार्यालय में हुई इस औचक कार्रवाई से पूरे विभाग में खलबली मच गई।
2023 से अटका था 25 लाख का भुगतान, फाइलों के चक्कर काट रहा था ठेकेदार
सरकारी विभागों में काम पूरा होने के बाद भी ठेकेदारों को अपना ही पैसा निकालने के लिए किस तरह जूतियां घिसनी पड़ती हैं, मेरठ का यह मामला इसका जीता-जागता उदाहरण है। बागपत के रहने वाले ठेकेदार सत्येंद्र सिंह तोमर ने पुलिस और एंटी करप्शन टीम को दी गई अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने साल 2023 में अपना निर्माण कार्य पूरी ईमानदारी और तय समय पर खत्म कर लिया था।
काम पूरा होने के बाद उनका करीब 25 लाख रुपये का भुगतान विभाग पर बकाया था। लेकिन राजकीय निर्माण निगम के कार्यालय में उनकी फाइल को अलग-अलग तकनीकी बहाने बनाकर रोक दिया गया। हफ्तों और महीनों तक दफ्तर के चक्कर काटने के बाद ठेकेदार को समझ आ गया कि बिना ‘चढ़ावा’ दिए उनका यह पैसा बाहर नहीं आने वाला है।
1.70 लाख से शुरू हुई सौदेबाजी, 1 लाख पर तय हुआ ‘कमीशन’
लंबे समय से मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो चुके ठेकेदार सत्येंद्र सिंह का संपर्क जब विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) योगेंद्र सिंह से हुआ, तो भ्रष्टाचार का असली खेल शुरू हुआ। आरोप है कि जेई ने 25 लाख रुपये की फाइल आगे बढ़ाने और भुगतान जारी करने के एवज में सीधे तौर पर 1.70 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की मांग कर डाली।
ठेकेदार ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, जिसके बाद मोलभाव का दौर चला। काफी मिन्नतों के बाद जेई 1 लाख रुपये की घूस लेकर बिल पास करने पर राजी हो गया। लेकिन ठेकेदार सत्येंद्र सिंह तोमर इस भ्रष्ट सिस्टम के आगे झुकने को तैयार नहीं थे। उन्होंने चुपचाप मेरठ की एंटी करप्शन (ACO) टीम से संपर्क किया और जेई की पूरी करतूत का कच्चा चिट्ठा खोल दिया।
घूसखोर जेई की चालाकी और एंटी करप्शन टीम का अचूक जाल
शिकायत मिलते ही एसीओ मेरठ प्रकोष्ठ के प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। मंगलवार की सुबह योजना के मुताबिक, ठेकेदार को 1 लाख रुपये के केमिकल लगे नोट देकर राजीवपुरम स्थित राजकीय निर्माण निगम के कार्यालय भेजा गया।
जेई योगेंद्र सिंह अंदर से डरा हुआ और बेहद शातिर था। पकड़े जाने के डर से उसने खुद सीधे पैसे लेने से इनकार कर दिया। अपनी जगह उसने परियोजना प्रबंधक (Project Manager) की गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर नीरज पाल को ठेकेदार से पैसे लेने के लिए भेजा। जैसे ही ठेकेदार ने ड्राइवर नीरज को केमिकल लगे 1 लाख रुपये थमाए, आसपास सादी वर्दी में तैनात एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया।
कार्यालय में मची अफरातफरी, भागते हुए पकड़ा गया जेई
ड्राइवर के पकड़े जाते ही एसीओ टीम उसे लेकर सीधे कार्यालय के अंदर पहुंची। बाहर की हलचल देखकर अंदर बैठे जेई योगेंद्र सिंह को भनक लग गई कि उसका खेल खत्म हो चुका है। खुद को फंसता देख जेई ने वहां से खिसकने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद टीम ने उसे दौड़ाकर मौके पर ही हिरासत में ले लिया।
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और गिरफ्तारी के चलते पूरे मेडिकल थाना क्षेत्र और निर्माण निगम के दफ्तर में भारी हड़कंप मच गया। वहां मौजूद अन्य कर्मचारी भी सकते में आ गए।
जीरो टॉलरेंस की सरकारी नीतियों के बावजूद, मेरठ की यह घटना साबित करती है कि कुछ अधिकारी अभी भी भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों से चिपके हुए हैं। एक लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए जेई और ड्राइवर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस दोनों आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है, ताकि इस पूरे नेक्सस में शामिल विभाग के अन्य बड़े चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके। यह कार्रवाई भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा सबक है कि कानून के लंबे हाथों से वे ज्यादा दिन तक बच नहीं सकते।

















































