उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में विकास कार्यों के दौरान एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। सादाबाद इलाके में नाली निर्माण के दौरान एक प्राथमिक विद्यालय की पुरानी और जर्जर दीवार अचानक भरभरा कर गिर गई। इस हादसे में मलबे के नीचे दबने से दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। इस घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है और निर्माण कार्यों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- हादसे की जगह: हाथरस जिले के सादाबाद कोतवाली क्षेत्र का गांव नीति निवास।
- घटना का कारण: ग्राम पंचायत निधि से चल रहे नाली निर्माण के दौरान स्कूल की जर्जर दीवार का गिरना।
- हताहत: मलबे में दबने से राजमिस्त्री डालचंद (45) और मजदूर मोहित (25) की मौत।
- घायल: 55 वर्षीय मजदूर सोनपाल गंभीर रूप से घायल, बिसावर के अस्पताल में इलाज जारी।
कैसे हुआ यह जानलेवा हादसा?
हाथरस जिले का सादाबाद कोतवाली क्षेत्र बुधवार शाम को चीख-पुकार से गूंज उठा। पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नीति निवास गांव में पानी की निकासी की समस्या को दूर करने के लिए ग्राम पंचायत निधि के तहत नाली निर्माण का काम चल रहा था। यह निर्माण कार्य गांव के ही प्राथमिक विद्यालय की चारदीवारी के ठीक बगल में किया जा रहा था। शाम करीब 6:30 बजे जब मजदूर अपना काम समेटने की तैयारी कर रहे थे, तभी स्कूल की वह पुरानी और जर्जर दीवार अचानक ढह गई।
मलबे में दबने से मची चीख-पुकार और अफरातफरी
दीवार गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके की तरफ दौड़ पड़े। घटनास्थल का नजारा बेहद खौफनाक था। मलबे के नीचे काम कर रहे तीन लोग पूरी तरह से दब चुके थे। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए अपने हाथों और फावड़े की मदद से मलबा हटाना शुरू किया और पुलिस को भी सूचना दी। कड़ी मशक्कत के बाद जब तक राजमिस्त्री डालचंद (45), मजदूर सोनपाल (55) और मोहित (25) को बाहर निकाला गया, तब तक स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी थी।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही टूट गई सांसें
मलबे से निकाले जाने के बाद जब पीड़ितों की जांच की गई, तो 45 वर्षीय राजमिस्त्री डालचंद की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो चुकी थी। वहीं, 25 वर्षीय युवा मजदूर मोहित की हालत बेहद नाजुक थी। उसे तुरंत बेहतर इलाज के लिए आगरा रेफर किया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मोहित ने आगरा के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस बीच, तीसरे घायल 55 वर्षीय सोनपाल का बिसावर के एक स्थानीय अस्पताल में सघन इलाज चल रहा है, जहां उसकी स्थिति स्थिर लेकिन गंभीर बनी हुई है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और उठते सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने ग्रामीण स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही को उजागर कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब स्कूल की दीवार इतनी जर्जर थी, तो उसके इतने करीब बिना किसी सुरक्षा उपाय के नाली की खुदाई क्यों करवाई जा रही थी? क्या संबंधित अधिकारियों या ग्राम पंचायत ने संभावित खतरे का आकलन नहीं किया था? यह घटना न केवल एक हादसा है, बल्कि कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक जीता-जागता और दुखद उदाहरण भी है।
हाथरस के नीति निवास गांव में हुए इस हादसे ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है। अब प्रशासन और पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। उम्मीद है कि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द उचित सरकारी मुआवजा मिलेगा और भविष्य में ऐसे निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित किए जाएंगे, ताकि किसी और गरीब मजदूर को अपनी जान से हाथ न धोना पड़े।

















































