अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की जन्मस्थली धर्मनगरी अयोध्या में शनिवार को 10वें दीपोत्सव का कीर्तिमान स्थापित हुआ। आस्था, विरासत और सांस्कृतिक वैभव के इस महापर्व पर सरयू नदी के कुल 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीपकों की लौ एक साथ प्रज्वलित हुई, जिसने समूची नगरी को स्वर्णिम आभा से नहला दिया। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मंत्रिमंडल के प्रमुख सदस्य और देश-दुनिया से उमड़ा अपार जनसैलाब बना। भक्ति और तकनीक के इस अनूठे संगम ने हर श्रद्धालु को मंत्रमुग्ध कर दिया।
आकाश में दिखा प्रभु श्रीराम का विहंगम रूप, लेजर शो से जीवंत हुआ रामायण काल
राम की पैड़ी और सरयू तट के ऊपर 2,100 अत्याधुनिक ड्रोन्स के माध्यम से आसमान में जब बालरूप प्रभु श्रीराम की अलौकिक छवि उकेरी गई, तो समूचा वातावरण जयकारों से गूंज उठा। इसके साथ ही भव्य लेजर शो के जरिए रामायण के कई अमर प्रसंगों को सजीव रूप दिया गया। ड्रोन्स और लेजर किरणों के समन्वय से भगवान राम और रावण के मध्य हुए महायुद्ध के दृश्य रचे गए। लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद पुष्पक विमान से प्रभु के अयोध्या आगमन का दृश्य जब नभमंडल में साकार हुआ, तब उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने मानव पिरामिड बनाकर शौर्य का अद्भुत प्रदर्शन किया। हाथों में शंख और गदा थामे कलाकारों ने भक्ति रस और पराक्रम का ऐसा समन्वय प्रस्तुत किया जिसे देख दर्शक स्तब्ध रह गए।
2,147 अर्चकों के मंत्रोच्चार से गूंजा तट, भव्य आतिशबाजी ने बांधा समां
दीपोत्सव की शाम सरयू तट का दृश्य उस समय और भी पावन हो गया जब 2,147 अर्चकों ने एक स्वर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां सरयू की महाआरती संपन्न की। महाआरती के पूर्ण होते ही सरयू का आकाश रंग-बिरंगी आतिशबाजी की रोशनी से नहा उठा। इस महासमारोह की शुरुआत लगभग तीन घंटे तक चली एक भव्य शोभायात्रा से हुई थी, जिसमें रामचरितमानस के सातों कांडों पर आधारित 21 मनमोहक झांकियों का प्रदर्शन किया गया। इन झांकियों के जरिए प्रभु श्रीराम के जीवन दर्शन को जन-जन के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
सीएम योगी बोले- 25 हजार से 30 लाख तक का सफर उत्तर प्रदेश की समृद्धि का प्रतीक
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की सांस्कृतिक और आर्थिक प्रगति का खाका खींचा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में पहले दीपोत्सव की शुरुआत मात्र 25 हजार दीयों के साथ हुई थी, जो आज बढ़कर 30 से 36 लाख दीपकों के विराट स्वरूप में परिवर्तित हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने इसे उत्तर प्रदेश की निरंतर बढ़ती आर्थिक सम्पन्नता, खुशहाली और आत्मविश्वास का जीवंत प्रमाण बताया। पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की आर्थिक स्थिति बदहाल थी और कर्मचारियों को वेतन देने तक के लाले पड़े थे। उन्होंने कहा कि पहले खजाने को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि वर्तमान सरकार आस्था के संरक्षण और आधुनिक विकास के संकल्प को एक साथ लेकर आगे बढ़ रही है।
माता कौशल्या और रामलला को समर्पित विशेष शोभायात्रा बनी आकर्षण का केंद्र
इस वर्ष के आयोजन में कौशल्या महिला मंडल द्वारा निकाली गई विशेष शोभायात्रा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया, जो माता कौशल्या के मातृ गौरव और रामलला के वात्सल्य को समर्पित थी। महिला संत डॉ. सुनीता शास्त्री ने इस सांस्कृतिक पहल के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम के साथ-साथ उनकी जननी माता कौशल्या के धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व को समाज के समक्ष लाना समय की आवश्यकता है। इस प्रयास को डॉ. अनिल मिश्र और नरेंद्र जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। संतों का मानना है कि अयोध्या में विकसित हो रहे इस सकारात्मक सांस्कृतिक परिवेश से रामायण के प्रेरक पात्रों और उनकी महान परंपराओं को वैश्विक पटल पर नई पहचान मिल रही है।


















































