एटा। उत्तर प्रदेश के एटा जनपद में मारहरा थाना पुलिस ने उच्च शिक्षा और चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिले के नाम पर संचालित हो रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने बिना मान्यता के कथित फर्जी मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय चलाने, छात्र-छात्राओं को दाखिले का झांसा देने तथा जाली शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह के पांच सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। अपहरण और दो लाख रुपये की फिरौती की एक फर्जी शिकायत की जांच के दौरान पुलिस इस संगठित शिक्षा माफिया गिरोह के नेटवर्क तक पहुंच गई।
फिरौती के झूठे ड्रामे से खुला फर्जी यूनिवर्सिटी का तिलिस्म
जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन ने इस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को शुरुआत में एक युवक के अपहरण और उसकी रिहाई के एवज में दो लाख रुपये की फिरौती मांगे जाने की सूचना मिली थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जब पुलिस ने गहराई से तफ्तीश शुरू की, तो अपहरण की कहानी पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठी पाई गई। इसी पड़ताल के तार जुड़ते-जुड़ते इलाके में चोरी-छिपे संचालित हो रहे एक जाली शैक्षणिक संस्थान और उसके अंतर-जनपदीय सिंडिकेट तक जा पहुंचे।
वर्ष 2022 से चल रहा था खेल, नर्सिंग और फार्मेसी के नाम पर उगाही
जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों को पता चला कि यह गिरोह वर्ष 2022 से सक्रिय था। आरोपी भोले-भाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को मेडिकल व पैरामेडिकल के क्षेत्र में उज्ज्वल भविष्य का सपना दिखाते थे। सिंडिकेट के सदस्य बी.फार्मा, डी.फार्मा, बीएससी नर्सिंग जैसे लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में दाखिला कराने का दावा कर प्रति छात्र भारी-भरकम रकम वसूलते थे। छात्र-छात्राओं को यह विश्वास दिलाया जाता था कि संस्थान पूरी तरह वैध और मान्यता प्राप्त है, जबकि हकीकत में संस्थान से लेकर जारी किए जाने वाले डिग्री-डिप्लोमा तक सब कुछ पूरी तरह फर्जी था।
दफ्तर से बरामद हुए फर्जी पहचान पत्र, मार्कशीट और एडमिशन रजिस्टर
पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने पर छापेमारी कर बड़े पैमाने पर आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है। बरामद सामान में एक डेस्कटॉप कंप्यूटर, विभिन्न महाविद्यालयों के नाम से तैयार किए गए फर्जी बैंक चेक, 16 जाली छात्र पहचान पत्र, प्रवेश आवेदन पत्र, दाखिला शीट, जाली मुहरें, फीस की रसीदें, उत्तर पुस्तिकाएं, पैम्फलेट और लेटर पैड शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस को आरोपियों के पास से छात्रों के फर्जी एनरोलमेंट नंबर, रोल नंबर, उपस्थिति पंजिका (अटेंडेंस) और प्रवेश से जुड़े विस्तृत अभिलेख भी हाथ लगे हैं।
गिरोह में शामिल कासगंज और एटा के पांचों अभियुक्त सलाखों के पीछे
पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान महमूदपुर नगरिया (मारहरा) निवासी सतेन्द्र कुमार (36 वर्ष), नदरई गेट (कासगंज) निवासी गौरव अग्रवाल (42 वर्ष), धरमपुर (मारहरा) निवासी भगवान दास (59 वर्ष), मोहल्ला पैठ (मारहरा) निवासी नरेन्द्र उर्फ पप्पू (58 वर्ष) और गफूरगंज (मारहरा) निवासी मो. शरीफ कुरैशी (75 वर्ष) के रूप में हुई है। एसएसपी डॉ. इलामारन ने स्पष्ट किया कि मामले की विवेचना जारी है। पुलिस की जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस जालसाज गिरोह ने अब तक कितने छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया और उनसे कुल कितने करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई है।





















































