लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी के आंतरिक उत्तराधिकार और पारिवारिक भागीदारी को लेकर एक बार फिर अप्रत्याशित कदम उठाया है। महज आठ दिन पहले ली गई अपनी ‘अंतिम प्रतिज्ञा’ को बदलते हुए बसपा प्रमुख ने नया फरमान जारी किया है। इसके तहत अब उनके छोटे भाई आनंद कुमार के बड़े बेटे आकाश आनंद और कानून की पढ़ाई कर रही बेटी दीपिका आनंद को संगठन की तमाम जिम्मेदारियों से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। पार्टी प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि अब भाई के कुनबे से सिर्फ छोटे पुत्र ईशान आनंद को ही संगठन में सम्मानजनक पद देकर आगे बढ़ाया जाएगा।
आठ दिन के भीतर बदला फैसला, पहले बेटों को राजनीति से दूर रखने की खाई थी कसम
गौरतलब है कि 12 सितंबर को मायावती ने सार्वजनिक तौर पर यह ऐलान किया था कि उनके अनुज आनंद कुमार के दोनों बेटों—आकाश और ईशान—को बसपा में किसी भी छोटे या बड़े ओहदे पर काम करने का अवसर नहीं मिलेगा। उन्होंने इसे अपना ‘अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा’ करार देते हुए कहा था कि यदि संगठन के कामकाज में आनंद कुमार को सहयोग की आवश्यकता पड़ी, तो वह अपनी कानून की छात्रा पुत्री दीपिका आनंद का सहयोग ले सकते हैं। हालांकि, रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने विस्तृत वक्तव्य में मायावती ने पूर्व रुख को पूरी तरह बदलते हुए आकाश और दीपिका दोनों के लिए पार्टी के दरवाजे बंद कर दिए और अब केवल ईशान आनंद पर दांव लगाने की घोषणा की।
आकाश आनंद पर ससुर के प्रभाव में आने का आरोप, वापसी की संभावनाएं खारिज
मायावती ने आकाश आनंद पर बेहद कड़े शब्दों में प्रहार करते हुए कहा कि वैवाहिक बंधन में बंधने के बाद से ही उनके व्यवहार और कार्यप्रणाली में लगातार नकारात्मक बदलाव देखे जा रहे थे। इसी आचरण के चलते उन्हें पूर्व में भी सांगठनिक जिम्मेदारियों से बेदखल करना पड़ा था। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आकाश इस समय अपने ससुर एवं पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के चंगुल में पूरी तरह जकड़ चुके हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसी परिस्थितियों में आकाश को दोबारा बसपा में जगह देना पार्टी कार्यकर्ताओं और आंदोलन के साथ गंभीर विश्वासघात होगा, जिसे वह किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगी।
दीपिका को दूर रखने की वजह और ईशान को चेतावनी के साथ अवसर
दीपिका आनंद को संगठन से अलग रखने के निर्णय पर रोशनी डालते हुए मायावती ने तर्क दिया कि यदि भविष्य में विवाह के उपरांत उनकी स्थिति भी आकाश आनंद जैसी हो गई, तो इससे पार्टी के हितों को भारी क्षति पहुंचेगी। ऐसे में गहन मंथन और लंबे समय से जारी असमंजस को समाप्त करते हुए उन्होंने आनंद कुमार के छोटे बेटे ईशान आनंद को ही आगे बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की है। हालांकि, मायावती ने ईशान के लिए भी कड़ा अनुशासन तय किया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ईशान की तरफ से भी पार्टी विरोधी कोई गतिविधि या आचरण सामने आया, तो उन्हें भी तत्काल प्रभाव से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा और उसके बाद आनंद कुमार के परिवार के किसी भी सदस्य को दल में कभी कोई दायित्व नहीं मिलेगा।
मान्यवर कांशीराम की परंपरा और आनंद कुमार का सांगठनिक इतिहास
बसपा सुप्रीमो ने अपने इस कड़े कदम को पार्टी संस्थापक मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों से जोड़ते हुए कहा कि साहिब कांशीराम ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में सगे-संबंधियों को राजनीतिक लाभ और पदों से हमेशा दूर रखा। उसी आदर्श पर चलते हुए उन्होंने स्वयं का जीवन भी बहुजन मिशन को समर्पित किया है। उल्लेखनीय है कि पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद 10 सितंबर को ही आकाश आनंद को दायित्वों से मुक्त किया गया था। वर्तमान में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का दायित्व संभाल रहे आनंद कुमार को मायावती ने 2017 में इस शर्त के साथ यह पद सौंपा था कि वह कभी चुनावी राजनीति (सांसद, विधायक या मंत्री पद) में नहीं उतरेंगे और न ही अपने उत्तराधिकार को बेटों या भावी पीढ़ी पर थोपेंगे।





















































