लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रियाओं और पारदर्शी व्यवस्था को लेकर सूबे की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पुलिस भर्ती में सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांटे जाने के चंद घंटों बाद ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार के दावों पर कड़ा हमला बोला। पूर्व मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में आरोप लगाया कि समूचे राष्ट्र में यदि सबसे अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं कहीं हुई हैं, तो वह राज्य उत्तर प्रदेश ही है।
योगी आदित्यनाथ का पिछली सरकारों पर वार, पारदर्शी चयन का दावा
इससे पूर्व, राजधानी लखनऊ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा चयनित लिपिक संवर्ग के 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस मंच से मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए वर्ष 2017 से पूर्व की शासन व्यवस्था को आड़े हाथों लिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि वर्ष 2017 से पहले चयन प्रक्रिया और परीक्षाओं की शुचिता हमेशा सवालों के घेरे में रहती थी तथा आए दिन प्रश्नपत्र लीक होने की गंभीर घटनाएं सामने आती थीं। योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि उनके नेतृत्व वाली सरकार ने पूरी चयन प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार लागू किए हैं, जिससे किसी भी योग्य अभ्यर्थी के अधिकारों का हनन न हो और केवल मेरिट के आधार पर निष्पक्ष रूप से अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
अखिलेश यादव का पलटवार: ‘रिकॉर्ड पेपर लीक और विकास के दावे कागजी’
मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम की समाप्ति के तुरंत बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने संवाददाताओं से मुखातिब होकर सरकार के शुचिता के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत सरकारी बयानों के बिल्कुल उलट है और देशभर में प्रश्नपत्र लीक के सर्वाधिक मामले उत्तर प्रदेश की झोली में दर्ज हुए हैं। भर्ती प्रक्रियाओं के अलावा अखिलेश यादव ने राज्य में भारी-भरकम पूंजी निवेश और औद्योगिकीकरण के वादों को भी खोखला करार दिया। सपा अध्यक्ष के अनुसार, जनता को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे कि सूबे में अपार निवेश आएगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि धरातल पर निवेश आया ही नहीं।
किसानों के मुआवजे और उपजाऊ जमीन अधिग्रहण पर खड़े किए सवाल
प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य और कृषक समुदाय की समस्याओं को उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यभर में उद्योगों के नाम पर किसानों से जमीनें तो ले ली गईं, लेकिन आज भी वे भूखंड खाली पड़े हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश के किसी भी अंचल में अन्नदाताओं को न तो उनकी अधिग्रहीत भूमि का समुचित मुआवजा प्रदान किया गया और न ही लंबे समय से सर्किल रेट में बढ़ोतरी की गई, जिससे किसान ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
बाबा साहेब की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने सामाजिक न्याय और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सम्मान के मुद्दे पर भी वर्तमान सत्ता पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शासन तंत्र में न तो संविधान निर्माता बाबा साहेब का सम्मान है, न ही उनकी प्रतिमाओं और उनके अनुयायियों की कोई कद्र है। सपा अध्यक्ष ने आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि भाजपा के शासनकाल में औसतन हर वर्ष 15 से अधिक आंबेडकर प्रतिमाओं को तोड़ा या क्षतिग्रस्त किया गया है। उन्होंने विवरण देते हुए कहा कि प्रदेश के 72 जनपदों में अब तक बाबा साहेब की 151 प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि प्रशासनिक विफलता का आलम यह है कि इतनी बड़ी घटनाओं के बावजूद अब तक महज 14 गिरफ्तारियां ही की जा सकी हैं।





















































