डिजिटल ठगी का शिकार हुईं चायल विधायक पूजा पाल
उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वीआईपी और जनप्रतिनिधि भी इनके निशाने पर आने लगे हैं। ताजा सनसनीखेज मामला कौशांबी जिले की चायल विधानसभा सीट से विधायक पूजा पाल से जुड़ा है, जिनके बैंक खाते में सेंध लगाकर शातिर ठगों ने लाखों रुपये की चपत लगा दी। विधायक के अनुसार, डिजिटल पेमेंट ऐप फोनपे के जरिए उनके खाते से अनाधिकृत तरीके से 1.55 लाख रुपये निकाल लिए गए। इस धोखाधड़ी की भनक लगते ही उन्होंने प्रयागराज के धूमनगंज थाने पहुंचकर पुलिस को आधिकारिक तहरीर सौंपी, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
आईफोन 17 हैक होने की आशंका, किस्तों में उड़ाए रुपये
विधायक पूजा पाल ने पुलिस को दी गई अपनी लिखित शिकायत में बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि साइबर शातिरों ने उनके अत्याधुनिक ‘आईफोन 17’ को रिमोटली हैक करके इस पूरी वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया। तहरीर में दर्ज ब्योरे के मुताबिक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में स्थित उनके बचत खाते को निशाना बनाया गया। जालसाजों ने एक झटके में पैसे निकालने के बजाय बेहद शातिराना तरीके से 22 अगस्त 2026 से लेकर 13 सितंबर 2026 के दरमियान कई बार में लगभग 1,55,000 रुपये फोनपे के माध्यम से ट्रांसफर कर लिए। जब खाते में लगातार हो रही संदिग्ध कटौती का पता चला, तब जाकर इस बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।
धूमनगंज थाने में आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज, जांच शुरू
विधायक की तहरीर को गंभीरता से लेते हुए प्रयागराज कमिश्नरेट के धूमनगंज थाने में अज्ञात जालसाज के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 66डी (कंप्यूटर संसाधन का उपयोग कर धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। धूमनगंज थाने के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर सेल की विशेष टीम को इस मामले में लगाया गया है। जिस बैंक खाते और यूपीआई आईडी में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, उनका डिजिटल ट्रेल खंगाला जा रहा है और जल्द ही आरोपियों को ट्रेस कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
राजू पाल हत्याकांड के बाद लगातार चर्चा में रही हैं विधायक
उल्लेखनीय है कि विधायक पूजा पाल प्रदेश की एक बेहद चर्चित राजनीतिक शख्सियत हैं। प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके गिरोह द्वारा पूजा पाल के पति व तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की दिनदहाड़े गोली मारकर की गई जघन्य हत्या के बाद वह सुर्खियों में आई थीं। लंबे समय तक इंसाफ की कानूनी लड़ाई लड़ने वाली पूजा पाल अब खुद इस तरह के संगठित साइबर अपराध का शिकार बनी हैं, जिससे आम जनता के बीच डिजिटल सुरक्षा और स्मार्टफोन की प्राइवेसी को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है।





















































