देवरिया के टाउनहाल ऑडिटोरियम में आयोजित अपना दल (एस) के जिला स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक हमारे समाज से गैर-बराबरी और सामाजिक असमानता का पूर्ण रूप से खात्मा नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण की व्यवस्था अक्षुण्ण रहेगी। इस संवैधानिक सुरक्षा चक्र को कमजोर करने या समाप्त करने का हक किसी के पास नहीं है।
आरक्षण किसी की अनुकंपा नहीं, बाबा साहेब के संविधान की देन
कार्यकर्ताओं के विशाल जनसमूह के सम्मुख अपने विचार रखते हुए अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस बात को रेखांकित किया कि आरक्षण कोई दया, भीख या खैरात नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के संविधान द्वारा वंचितों को सौंपा गया एक ऐतिहासिक अधिकार है। देश के संविधान निर्माताओं ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े पिछड़े, दलित, शोषित और वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा में बराबरी का स्थान दिलाने के उद्देश्य से ही उच्च शिक्षण संस्थानों और सरकारी सेवाओं में यह सुरक्षा कवच प्रदान किया था, ताकि वे गौरवपूर्ण जीवन जी सकें।
केंद्र सरकार के ईडब्ल्यूएस फैसले का किया उल्लेख
नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों की प्रशंसा करते हुए अनुप्रिया पटेल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान शासन सामाजिक न्याय के दायरे को लगातार विस्तार दे रहा है। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों (ईडब्ल्यूएस) को 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करके केंद्र सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वंचितों की मदद का दायरा व्यापक है। अब यह संवैधानिक लाभ केवल किसी खास तबके तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जरूरतमंदों को सशक्त बनाने का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है।
चुनावी मौसम में आरक्षण पर भ्रम फैलाने वालों को घेरा
केंद्रीय मंत्री ने विपक्षी दलों के दोहरे रवैये पर सीधा हमला बोलते हुए आम जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा कि जैसे ही चुनावी बिगुल बजता है, कुछ राजनीतिक संगठन समाज में डर और गलतफहमी फैलाने के लिए आरक्षण के मुद्दे को हवा देने लगते हैं। जनता को ऐसे राजनीतिक पैंतरों को समझना चाहिए और यह प्रश्न पूछना चाहिए कि आखिर चुनावों के मुहाने पर ही यह विमर्श क्यों छेड़ा जाता है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार के राजनीतिक बहकावे में न आएं।
जमीनी हकीकत पर पूछे तीखे सवाल, विपक्ष के दावों की खोली पोल
विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने सवाल किया कि जो लोग आरक्षण को लेकर झूठा विमर्श गढ़ रहे हैं, उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि क्या जमीनी स्तर पर भेदभाव खत्म हो चुका है? क्या सरकारी महकमों में आरक्षित पदों का बैकलॉग पूरी तरह भर चुका है? क्या प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछड़े, दलित और वंचित युवाओं को उनकी आबादी के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व मिल चुका है?
उन्होंने कहा कि जब तक इन सवालों के जवाब ‘ना’ में हैं, तब तक यह साफ है कि सामाजिक गैर-बराबरी अभी भी विद्यमान है। सत्ता से बाहर होते ही पिछड़े-दलितों की चिंता का दिखावा करने वाले दलों को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि अपने लंबे शासनकाल के दौरान उन्होंने इन वंचित वर्गों के उत्थान और अधिकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए।



















































