कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर से फर्जीवाड़े और विभागीय लापरवाही का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। महीने में महज दस हजार रुपये कमाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले एक साधारण सुरक्षा गार्ड के नाम पर जालसाजों ने फर्जी कंपनी खड़ी कर दी। इसके बाद जीएसटी विभाग ने पीड़ित को 17 करोड़ रुपये से अधिक के कथित टर्नओवर पर 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का टैक्स नोटिस भेज दिया। इस भारी-भरकम नोटिस के बाद पीड़ित की नौकरी चली गई, राशन कार्ड निरस्त हो गया और परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया। मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस कमिश्नर ने तत्काल मुकदमा दर्ज करने और पूरे प्रकरण की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपने का निर्देश दिया है।
एक नोटिस ने बदली जिंदगी, परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट
कानपुर के नौबस्ता क्षेत्र स्थित हंसपुरम निवासी ओम जी शुक्ला निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्य कर अपने परिवार का गुजारा करते थे। उनकी सामान्य जिंदगी में भूचाल तब आया, जब सितंबर 2025 में जीएसटी विभाग ने उनके पते पर एक वसूली नोटिस भेजा। इस नोटिस में बताया गया कि उनके नाम पर पंजीकृत फर्म ने 17 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है, जिसके एवज में उन पर 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी बनती है। पीड़ित का कहना है कि जिस व्यक्ति ने अपने पूरे जीवनकाल में कभी तीन लाख रुपये एक साथ नहीं देखे, उसके नाम पर करोड़ों का टैक्स निकाल दिया गया। इस नोटिस के बाद अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते उनकी नौकरी भी छूट गई।
सरकारी रिकॉर्ड में ‘करोड़पति’ बनते ही रद्द हुआ राशन कार्ड
फर्जीवाड़े का असर केवल नोटिस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कागजों में करोड़ों का टर्नओवर दर्ज होने के कारण प्रशासन ने उनका गरीबी रेखा से जुड़ा राशन कार्ड भी निरस्त कर दिया। सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित होने के बाद पीड़ित के घर में चूल्हा जलना तक दूभर हो गया। विभागीय चौखटों से लगातार निराशा हाथ लगने के बाद पीड़ित ने पुलिस उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाने का फैसला किया।
पुलिस कमिश्नर के सामने छलका दर्द, क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच
मंगलवार को पीड़ित ओम जी शुक्ला पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के कार्यालय पहुंचे और अपनी व्यथा बताते हुए फफक पड़े। पीड़ित ने आशंका जताई कि किसी अज्ञात सिंडिकेट ने उनके पैन कार्ड और अन्य निजी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम पर बोगस फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया और बिना उनकी भनक लगे करोड़ों का अवैध लेन-देन कर डाला। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने नौबस्ता थाना पुलिस को तुरंत सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही इस पूरे अंतरराज्यीय या स्थानीय फर्जीवाड़े की तह तक जाने के लिए जांच सीधे क्राइम ब्रांच को हस्तांतरित कर दी गई है।
व्यापार मंडल ने उठाए सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के उजागर होने के बाद स्थानीय व्यापार मंडल ने भी वाणिज्य कर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। व्यापारिक प्रतिनिधियों का कहना है कि किसी भी नई फर्म को जीएसटी पंजीकरण जारी करते समय भौतिक सत्यापन, आधार-पैन लिंकिंग और फोटोग्राफ जैसी सख्त प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। ऐसे में एक अल्प आय वाले सुरक्षा गार्ड के नाम पर इतनी बड़ी जाली फर्म कैसे पंजीकृत हो गई और किन अधिकारियों की लापरवाही से यह खेल चला? फिलहाल पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीमें दस्तावेजों के स्रोत और संदिग्ध बैंक खातों को खंगालने में जुटी हैं।





















































