मुजफ्फरनगर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में आस्था की पवित्र कांवड़ यात्रा के औपचारिक आगाज से ठीक पहले कानून-व्यवस्था और श्रद्धालुओं के बीच तीखी तकरार का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। शुक्रवार की देर रात शहर कोतवाली क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर और कांवड़ियों के बीच जबरदस्त नोकझोंक हो गई। इस गहमागहमी के दौरान एक आक्रोशित श्रद्धालु ने ऑन-ड्यूटी कोतवाल को सीधे तौर पर ‘5 मिनट में वर्दी उतरवा देने’ की खुली धमकी दे डाली। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पुलिस महकमे से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक खलबली मचा दी है। विवाद बढ़ने पर भड़के कांवड़ियों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन भी किया, जिसके बाद वरिष्ठ पुलिस अफसरों को मोर्चा संभालना पड़ा।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भड़का विवाद, डीजे पर चढ़ने से रोकने पर ठनी
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम शहर कोतवाली के बिल्कुल नजदीक घटित हुआ। पवित्र तीर्थनगरी की ओर बढ़ रहे एक विशाल डीजे (ध्वनि विस्तारक यंत्र) वाहन के अत्यधिक ऊंचे हिस्से पर कुछ कांवड़िये खड़े होकर यात्रा कर रहे थे। कांवड़ यात्रा मार्ग पर बिजली के झूलते तारों और अचानक लगने वाले झटकों से होने वाली किसी भी संभावित अनहोनी या दुर्घटना को रोकने के उद्देश्य से वहां मुस्तैद शहर कोतवाल इंस्पेक्टर बृजेश शर्मा ने सुरक्षा का हवाला दिया।
इंस्पेक्टर ने डीजे वाहन के ऊपर खतरनाक तरीके से खड़े कांवड़ियों को तत्काल नीचे उतरने की हिदायत दी। पुलिस की इसी टोंक-टांक को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले आम बहस शुरू हुई, जिसने देखते ही देखते एक बड़े विवाद का रूप अख्तियार कर लिया।
आक्रोशित श्रद्धालुओं का आरोप: इंस्पेक्टर ने किया आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग
इस पूरे विवाद में कांवड़ियों का पक्ष बेहद आक्रामक नजर आया। श्रद्धालुओं ने मौके पर ही आरोप लगाया कि सुरक्षा का पाठ पढ़ाने के दौरान शहर कोतवाल बृजेश शर्मा ने अपनी मर्यादा खो दी और उनके साथ बेहद आपत्तिजनक, अभद्र और सख्त लहजे में बात की। कांवड़ियों का कहना था कि धार्मिक यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के साथ पुलिस का ऐसा अड़ियल और दमनकारी रवैया बेहद निंदनीय है।
कोतवाल की कथित कड़क भाषा से आहत होकर तमाम शिवभक्तों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। विवाद इस कदर बढ़ा कि कांवड़ियों का जत्था वहीं सड़क पर बैठ गया और उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रसिद्ध शिव चौक पर धरना देना शुरू कर दिया, जिससे मुख्य मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, ‘वर्दी का गुरूर’ उतारने की दी खुली चुनौती
घटना के कुछ ही घंटों बाद पूरे मामले का एक लाइव वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल गया। वायरल क्लिप में साफ देखा जा सकता है कि कैसे भारी पुलिस बल की मौजूदगी में एक कांवड़िया सीधे इंस्पेक्टर बृजेश शर्मा की तरफ उंगली उठाकर चिल्ला रहा है।
वीडियो में वह शख्स साफ तौर पर यह कहता सुनाई दे रहा है कि, “अगर तुम्हें अपनी वर्दी का गुरूर है तो बताओ… 5 मिनट के भीतर तुम्हारी यह वर्दी उतरवा दूंगा।” इस वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं। जहां एक पक्ष पुलिस की सुरक्षा चिंताओं को जायज ठहरा रहा है, वहीं दूसरा पक्ष श्रद्धालुओं के साथ विनम्र व्यवहार की वकालत कर रहा है।
एएसपी सिद्धार्थ मिश्रा ने संभाला मोर्चा, कोतवाल के शब्द वापस लेने पर थमा बवाल
मामले की गंभीरता और कांवड़ियों के उग्र होते प्रदर्शन को देखते हुए जिले के आला पुलिस अधिकारियों ने तुरंत घटना स्थल का रुख किया। अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सिद्धार्थ के. मिश्रा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने धरने पर बैठे कांवड़ियों के बीच जाकर उनसे बेहद संवेदनशील तरीके से संवाद स्थापित किया।
एएसपी ने शिवभक्तों को समझाते हुए पूरे घटनाक्रम पर गहरा खेद प्रकट किया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी और हस्तक्षेप के बाद माहौल शांत हुआ। इसके बाद शहर कोतवाल ने भी स्थिति को संभालते हुए अपने कहे शब्दों को वापस लिया। पुलिस प्रशासन के इस रुख के बाद कांवड़ियों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने अपना धरना समाप्त कर बम-बम भोले के जयकारों के साथ अपनी यात्रा को आगे के लिए रवाना किया।
मुजफ्फरनगर प्रशासन मुस्तैद, वायरल वीडियो के आधार पर जांच के आदेश
इस हाई-प्रोफाइल विवाद के शांत होने के बाद भी प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिला प्रशासन और पुलिस मुख्यालय का कहना है कि समूची कांवड़ यात्रा को पूरी तरह शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराना उनकी सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सुरक्षा मानकों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो फुटेज और मौके पर मौजूद अन्य चश्मदीदों के बयानों को संकलित किया जा रहा है। तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय स्थिति या पुलिस-पब्लिक टकराव से बचा जा सके।





















































