पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता ने जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत दिलाई है, वहीं मूसलाधार बारिश के चलते कई जिलों पर जलप्रलय का साया गहराने लगा है। बीते चौबीस घंटों में हुई झमाझम बारिश के प्रभाव से तराई और पूर्वांचल के मैदानी भागों में बहने वाली प्रमुख नदियों का प्रवाह अचानक तीव्र हो गया है। केंद्रीय जल आयोग की ओर से जारी आधिकारिक दैनिक बुलेटिन ने स्पष्ट किया है कि कई प्रमुख जलस्रोतों का जलस्तर तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में कटान और बाढ़ जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों का अंदेशा गहरा गया है।
क्वानो और घाघरा बेसिन में जमकर बरसे बादल
केंद्रीय जल आयोग के शुक्रवार के वर्षा मापन आंकड़ों पर नजर डालें तो सर्वाधिक मेघ क्वानो नदी क्षेत्र के गुमड़ियाघाट पर बरसे, जहां 113.8 मिलीमीटर की भारी बरसात रिकॉर्ड की गई। इसके अतिरिक्त घाघरा बेसिन के सोनौली मोहम्मदपुर में 95 मिलीमीटर, राप्ती नदी के माधवपुर में 91 मिलीमीटर तथा कठकड़धरी में 83.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में चंदन नदी के ठूठीबारी में 81.6 मिलीमीटर, बस्ती में 77 मिलीमीटर, ककराही (बूढ़ी राप्ती) में 76 मिलीमीटर, बांसी में 74.6 मिलीमीटर, मुहचुर्वा घाट में 73.2 मिलीमीटर और कुन्हारा नदी के उस्का बाजार में 66 मिलीमीटर पानी गिरा। विस्तृत क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार गोंडा उपखंड में 74.2 मिमी, अयोध्या में 51 मिमी, कर्नलगंज में 44 मिमी, मनीराम में 52.2 मिमी, बहराइच के बिंघा में 46.4 मिमी, ढोबहट में 44.2 मिमी, कुकैया में 26.8 मिमी, मोटीपुर में 24.4 मिमी, रामनगर बाघा में 12.4 मिमी और शारदानगर में 11.8 मिमी वर्षा आंकी गई।
राप्ती और उसकी सहायक धाराओं में उफान
नदियों के ताज़ा प्रवाह की बात करें तो राप्ती नदी के बडर्घाट पर 56.8 मिलीमीटर बारिश के साथ जलस्तर 71.10 मीटर पर पहुंच गया है, जहां चढ़ाव का सिलसिला जारी है। ककरधरी में राप्ती का स्तर 128.52 मीटर और बलरामपुर में 101.82 मीटर मापा गया, जहां दोनों ही केंद्रों पर जलस्तर लगातार ऊपर चढ़ रहा है। इसके उलट, बांसी में राप्ती का स्तर 81.52 मीटर दर्ज होने के साथ हल्की गिरावट के संकेत मिले हैं। बडर्घाट के अतिरिक्त रेगौली, बिसुआही तथा बूढ़ी राप्ती के कैचमेंट में भी जलस्तर बढ़ने की रफ्तार बनी हुई है। बूढ़ी राप्ती के परसोहन घाट पर जलस्तर 90.48 मीटर और ककराही में 84.69 मीटर दर्ज किया गया, जहां दोनों स्थानों पर जलस्तर में वृद्धि देखी जा रही है।
रोहिन और क्वानो का बढ़ा दायरा, घाघरा में स्थिरता
रोहिन नदी के मनीराम स्टेशन पर पानी का स्तर 71.35 मीटर और त्रिमोहिनीघाट पर 78.32 मीटर आंका गया, जहां जलस्तर निरंतर ऊपर की ओर बढ़ रहा है। उधर, क्वानो नदी का रुख भी आक्रामक है; मुखलिसपुर में यह 76.30 मीटर, गुमड़ियाघाट में 95.69 मीटर और चंद्रदीपघाट पर 88.72 मीटर पर प्रवाहित हो रही है। दूसरी तरफ, घाघरा नदी में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। अयोध्या में इसका जलस्तर 91.67 मीटर और एल्गिनब्रिज में 104.92 मीटर दर्ज हुआ, जहां प्रवाह स्थिर अथवा हल्का उतार पर है। तुर्तीपार में घाघरा 63 मीटर पर स्थिर बनी हुई है, जबकि सरयू-बबई संगम क्षेत्र के गायघाट पर जलस्तर 128.33 मीटर के साथ अपरिवर्तित रहा।
बैराजों पर स्थिति और प्रशासनिक सतर्कता
सीमावर्ती एवं प्रमुख जल संरचनाओं में घाघरा नदी के कतरनियाघाट बैराज पर 136.8 मीटर तथा शारदा नदी के बनबसा बैराज पर 222.6 मीटर जलस्तर रिकॉर्ड किया गया, जहां स्थिति पूरी तरह स्थिर पाई गई। राहत की बात यह है कि पूर्वांचल की अधिकांश प्रमुख नदियां अभी अपने सर्वकालिक उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से नीचे ही बह रही हैं। यद्यपि कई तटीय बिंदुओं पर जलस्तर में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे प्रशासन और संबंधित विभाग हालात पर बारीक निगरानी बनाए हुए हैं।




















































