उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को एक बड़ा ऐतिहासिक तोहफा दिया है। आपातकाल की 51वीं बरसी के अवसर पर आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र के प्रहरियों को सम्मानित किया और उनके कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि राज्य सरकार जल्द ही सभी लोकतंत्र सेनानियों को प्रतिवर्ष ₹5,00000 तक की कैशलेस चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही, भावी पीढ़ियों के प्रेरणास्रोत रहे इन वीर सेनानियों के दिवंगत होने पर उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की पुख्ता व्यवस्था भी की जा रही है।
₹5 लाख की स्वास्थ्य सुरक्षा और राजकीय सम्मान देने की तैयारी
राजधानी लखनऊ में आयोजित एक भव्य गरिमामय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों की बदौलत ही आज देश में लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित हैं। उन्होंने सेनानियों के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए नए सुरक्षा कवच की घोषणा की।
अब तक सरकारी अस्पतालों में मिल रही निशुल्क चिकित्सा के दायरे को बढ़ाते हुए अब इन्हें ₹5 लाख सालाना की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा से जोड़ा जा रहा है। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि जो भी नागरिक देश और लोकतंत्र के हित में अपना सर्वस्व दांव पर लगाएगा, सरकारें सदैव उनका पूर्ण सम्मान करेंगी। इसी क्रम में अब उनके निधन पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने की नियमावली तैयार की जा रही है।
उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र के प्रहरियों को मिल रही हैं ये बड़ी सहूलियतें
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि जब भी राज्य में लोकतांत्रिक और राष्ट्रभक्त विचारों के प्रति समर्पित सरकार रही है, तब-तब इन राष्ट्रनायकों के मान-सम्मान को सर्वोपरि रखा गया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के भीतर 3,780 जीवित लोकतंत्र सेनानी और दिवंगत हो चुके सेनानियों के 1,461 आश्रित मौजूद हैं।
योगी सरकार ने इन सभी परिवारों को संबल देने के लिए वर्ष 2018 से ही ₹20,000 प्रति माह की सम्मान राशि (पेंशन) देना शुरू किया था, जो निरंतर जारी है। इसके अतिरिक्त, लोकतंत्र सेनानियों अथवा उनके उत्तराधिकारी (पति या पत्नी) को एक सहायक (अटेंडेंट) के साथ पूरे प्रदेश में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की सभी श्रेणियों की बसों में मुफ्त यात्रा करने की वीआईपी सुविधा भी पहले से प्रदान की जा रही है।
सीएम योगी ने इन प्रमुख सेनानियों का मंच से किया गरिमामय अभिनंदन
इस विशेष राजकीय समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद आगे बढ़कर उन सेनानियों को सम्मानित किया, जिन्होंने आपातकाल के दौरान क्रूर यातनाएं झेली थीं। मंच से सम्मानित होने वाले प्रमुख प्रहरियों में भारत दीक्षित, गया प्रसाद सोनकर, हरदोई जिले से ताल्लुक रखने वाले राम सिंह कुशवाहा व विद्या राम वर्मा, बाराबंकी के अजय सिंह और सीतापुर के रहने वाले ओम प्रकाश गुप्ता शामिल रहे। इन सभी राष्ट्रभक्तों ने आपातकाल के विरोध में आवाज उठाने के कारण न्यूनतम 6 महीने से लेकर लंबी अवधि तक कारागार की काल कोठरियों में असहनीय मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना सहन की थी।
जेल के वो खौफनाक दिन: सेनानियों ने बयां की 1975 की दर्दनाक दास्तां
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए वयोवृद्ध लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित ने उस दौर की तानाशाही को याद किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 में देश के भीतर आपातकाल थोपने का कोई भी तार्किक कारण मौजूद नहीं था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार केवल और केवल किसी भी हथकंडे से अपनी सत्ता बचाए रखना चाहती थी। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तो पुलिस ने उनके कपड़े तक फाड़ दिए थे। इस दमन के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और जब सत्याग्रह में हिस्सा लिया, तो उन पर और अधिक जुल्म ढाए गए।
वहीं, एक अन्य सेनानी विद्या राम वर्मा ने रोते हुए अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने कहा कि आज इतने दशक बीत जाने के बाद भी जब वह जेल के उन दिनों को याद करते हैं, तो उनका दिल बैठ जाता है। उस समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) को छोड़कर देश के सभी विपक्षी दलों और वैचारिक संगठनों के कार्यकर्ताओं पर बर्बरता की सारी हदें पार कर दी गई थीं। विद्या राम ने बताया कि आधी रात को उनके घर को पुलिस ने इस तरह घेरा था, मानो वे किसी खूंखार डकैत को पकड़ने आए हों। कारागार के भीतर कैदियों के हाथों के नाखून तक उखाड़ दिए जाते थे और तानाशाही के तहत जबरन नसबंदी जैसी क्रूरताओं को अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि उस समय की सरकार ने जो जुल्म किए, आज की युवा पीढ़ी उसका अंदाजा भी नहीं लगा सकती।





















































