उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक ऐसा हैरान कर देने वाला वाकया सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। एक परिवार ने जिस युवक को मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया और हाल ही में उसकी आत्मा की शांति के लिए तेरहवीं का भोज भी संपन्न कर लिया, वह युवक अगले ही दिन अचानक जीवित अवस्था में अपने घर वापस लौट आया। अपने मरे हुए बेटे को अचानक जीवित आंखों के सामने खड़ा देखकर मां की आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है और अब पुलिस ने बंद हो चुके इस मामले की पड़ताल नए सिरे से शुरू कर दी है।
शांति भंग के आरोप में गया था जेल, रिहाई के बाद हुआ था लापता
यह अजीबोगरीब मामला गाजियाबाद के वैशाली क्षेत्र का है। पुलिस द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वैशाली के कल्पना अपार्टमेंट में रहने वाले गिरधर सिंह बिष्ट को बीते 16 मई को स्थानीय दुकानदारों के साथ हुए एक विवाद के बाद पुलिस ने हिरासत में लिया था। उस वक्त पुलिस ने शांति भंग करने की आशंका के तहत उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की थी और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।
इसके बाद, 21 मई को गिरधर सिंह बिष्ट डासना जेल से जमानत पर रिहा हुआ। जेल से बाहर आने के बाद उसे अपने घर पहुंचना था, लेकिन वह रहस्यमय तरीके से लापता हो गया और अपने निवास स्थान पर नहीं लौटा।
अज्ञात शव को बेटा मानकर किया अंतिम संस्कार, 6 पर दर्ज कराया मर्डर केस
बेटे के घर न पहुंचने पर चिंतित परिजनों ने उसकी काफी खोजबीन की। जब सभी संभावित ठिकानों पर तलाश करने के बाद भी गिरधर का कुछ पता नहीं चला, तो परिवार के सदस्यों ने मसूरी थाने में उसकी गुमशुदगी (Missing Complaint) की लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई। इसी बीच, पुलिस को तफ्तीश के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ।
शव की स्थिति को देखते हुए गिरधर के परिजनों को शिनाख्त के लिए बुलाया गया। बदहवास परिवार ने उस लावारिस लाश को गिरधर सिंह बिष्ट का शव समझकर उसकी पहचान कर ली। इसके बाद पुलिस ने शव का कानूनी पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने इस मामले को हत्या मानते हुए छह नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या (Section 302) का मुकदमा दर्ज कर लिया। पोस्टमार्टम के बाद शव को अंतिम क्रियाकर्म के लिए परिवार को सौंप दिया गया, जिन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से उसका दाह-संस्कार किया और बीती 24 जून को उसकी तेरहवीं का कार्यक्रम भी आयोजित किया।
तड़के सुबह 5 बजे घर के दरवाजे पर दी दस्तक, जांच में जुटी पुलिस
सहायक पुलिस आयुक्त (इंडीविजुअल/इंदिरापुरम) अभिषेक श्रीवास्तव ने इस सनसनीखेज मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह करीब पांच बजे गिरधर सिंह बिष्ट अचानक अपने वैशाली स्थित घर पर सकुशल वापस लौट आया। उसे दरवाजे पर खड़ा देख पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
एसीपी ने बताया कि युवक को तत्काल संरक्षण में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है कि वह इतने दिनों तक कहां गायब था, उसने अपने परिवार से संपर्क क्यों नहीं किया और वह किन परिस्थितियों में वापस आया है। पुलिस अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस अज्ञात शव का पोस्टमार्टम कराया गया था, उसकी रिपोर्ट में मौत की असली वजह पानी में डूबना (Drowning) सामने आई थी।
छह आरोपियों पर दर्ज मुकदमे पर पुनर्विचार, असली शव की खोज शुरू
गिरधर सिंह बिष्ट के जीवित वापस लौट आने के बाद अब गाजियाबाद पुलिस के सामने दो बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। पहली चुनौती उस अज्ञात शव की वास्तविक शिनाख्त (Identification) करने की है, जिसका अंतिम संस्कार किया जा चुका है। पुलिस अब नए सिरे से जांच कर रही है कि वह शव आखिर किसका था और उसकी मौत किन हालातों में हुई थी।
इसके साथ ही, गिरधर की कथित हत्या के आरोप में जिन छह बेगुनाह लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया था, उस कानूनी कार्रवाई और मुकदमे पर अब वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पुनर्विचार किया जा रहा है। पुलिस पूरे मामले के तकनीकी और कानूनी पहलुओं को सत्यापित करने में जुट गई है।





















































