अयोध्या में भव्य राम मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों ने अब एक नया और बड़ा मोड़ ले लिया है। विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई एफआईआर के बाद, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में नाम सामने आने के बाद दोनों शीर्ष पदाधिकारियों पर नैतिक जिम्मेदारी लेने का भारी दबाव था। इस प्रशासनिक फेरबदल और कानूनी कार्रवाई ने अयोध्या से लेकर लखनऊ तक के सियासी और धार्मिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
नैतिकता के आधार पर शीर्ष पदाधिकारियों का त्यागपत्र
राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे में हुई कथित धांधली के उजागर होने के बाद से ही ट्रस्ट के प्रबंधन पर लगातार सवाल उठ रहे थे। हालांकि शुरुआती कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर हुई, लेकिन इसके बाद यह मांग तेज हो गई कि प्रबंधन के शीर्ष स्तर पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय की जाए। चौतरफा बनते दबाव और चौतरफा आलोचनाओं के बीच आखिरकार महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को अपने पदों से हटना पड़ा। माना जा रहा है कि इस बड़े घटनाक्रम के बाद ट्रस्ट के पुनर्गठन और जांच की दिशा में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कड़ा रुख और SIT का एक्शन
इस पूरे संवेदनशील मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि जैसे ही दान राशि में हेराफेरी के शुरुआती संकेत मिले थे, सरकार ने बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से एसआईटी (SIT) के गठन के निर्देश दे दिए थे। इसी मुस्तैदी का नतीजा है कि जांच टीम ने बेहद कम समय में गड़बड़ी की कड़ियों को जोड़कर आरोपियों को बेनकाब करना शुरू कर दिया है।
आधी रात को बड़ी कार्रवाई: आठ आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल
उत्तर प्रदेश पुलिस और एसआईटी की संयुक्त कार्रवाई के तहत गुरुवार की देर रात एक बड़ा एक्शन देखने को मिला। मंदिर परिसर में तैनात कर्मचारियों, दान की नकदी गिनने वाले स्टाफ और कुछ पूर्व बैंक अधिकारियों सहित कुल आठ लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई। इन सभी पर आपसी मिलीभगत और सुनियोजित साजिश के तहत मंदिर के खजाने और दान पेटियों से राशि का गबन करने का संगीन आरोप है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों की सूची इस प्रकार है:
- अविनाश शुक्ला
- अनुकल्प मिश्रा
- लवकुश मिश्रा
- मनीष कुमार यादव
- करुणेश पांडेय
- रामाशंकर मिश्रा
- सुभाष श्रीवास्तव
- राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू
नए कानून (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज
आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने के लिए पुलिस ने नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की बेहद सख्त धाराओं का प्रयोग किया है। दर्ज की गई एफआईआर में धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) बीएनएस (BNS) के साथ-साथ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (PC Act) की धारा 13(1)(ए) शामिल की गई है। इन धाराओं के तहत दोषियों को लंबे समय तक जेल की सजा हो सकती है, जिससे यह साफ है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रहा है।
लखनऊ कमिश्नर की रिपोर्ट में कठोर कार्रवाई की सिफारिश
इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जून को श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के ही लिखित अनुरोध पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस जांच टीम की कमान लखनऊ मंडल के आयुक्त (कमिश्नर) विजय विश्वास पंत संभाल रहे हैं। कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने गत मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ राज्य शासन को अपनी प्रारंभिक और अंतरिम जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इस गोपनीय रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अत्यंत कठोर दंडात्मक और प्रशासनिक संस्तुतियां की गई थीं, जिसके बाद ही गिरफ्तारियों का यह सिलसिला शुरू हुआ।
केवल छोटे कर्मचारियों पर गाज क्यों? उठे गंभीर सवाल
एसआईटी की शुरुआती एफआईआर और आठ कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक कई तरह के सवाल तैरने लगे थे। आम जनता और प्रबुद्ध वर्ग का कहना था कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे की गिनती और उसकी सुरक्षा की देखरेख करने वाले बड़े अधिकारियों की नाक के नीचे इतना बड़ा घोटाला कैसे हो गया? केवल काउंटिंग स्टाफ और निचले स्तर के बैंक कर्मियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े चेहरों को बचाने की कोशिशों के आरोप भी लगने शुरू हो गए थे। इसी बढ़ते असंतोष और जवाबदेही के सवालों के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे सामने आए हैं, जिसे इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच का दायरा बढ़ने के साथ कुछ और बड़े चेहरों पर गाज गिरने की पूरी संभावना जताई जा रही है।





















































