उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में बीते सोमवार को हुए हृदयविदारक अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस भीषण त्रासदी में जान गंवाने वाले 15 अभागे लोगों की मौत के असली कारणों से अब पर्दा उठ गया है। डॉक्टरों के विशेष पैनल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट में यह बेहद चौंकाने वाला और दर्दनाक सच सामने आया है कि सभी मृतकों की जान आग की लपटों से जलने के कारण नहीं, बल्कि दम घुटने (Asphyxiation) की वजह से हुई है। मेडिकल सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, किसी भी शव के बाह्य या आंतरिक परीक्षण में शरीर पर चोट का कोई ऐसा गंभीर निशान अथवा घाव नहीं पाया गया है, जिसे मृत्यु की सीधी वजह माना जा सके।
चेहरे पर सूजन और सांस की नली में मिली कालिख
पोस्टमार्टम करने वाले फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉक्टरों की टीम को शवों पर सीधे तौर पर झुलसने या गहरे जख्मों के कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले हैं। इसके विपरीत, कई शवों के चेहरों और आंखों के आस-पास अत्यधिक सूजन (Edema) दर्ज की गई। सबसे अहम सुराग डॉक्टरों को तब मिला जब शवों के श्वसन मार्ग (सांस की नली) और नाक के भीतर भारी मात्रा में कालिख और कार्बन के बारीक कण जमे हुए पाए गए। यह इस बात का स्पष्ट और वैज्ञानिक प्रमाण है कि जब इमारत में भीषण आग लगी, तब वहां मौजूद लोग काफी समय तक जहरीले धुएं के बीच फंसे रहे। उनके शरीर और फेफड़ों के भीतर अत्यधिक धुआं प्रवेश कर गया, जिसके चलते वे सांस नहीं ले पाए और तड़प-तड़प कर उनकी मौत हो गई।
बंद कमरों में ऑक्सीजन का खत्म होना बना काल, डॉक्टर ने बताई अंदर की कहानी
पोस्टमार्टम टीम का हिस्सा रहे एक वरिष्ठ चिकित्सक ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर इस वैज्ञानिक प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया:
“पोस्टमार्टम के अंतिम निष्कर्षों से यह पूरी तरह प्रमाणित होता है कि सभी 15 हताहतों की मौत फेफड़ों में अत्यधिक मात्रा में जहरीला धुआं भर जाने के कारण श्वसन तंत्र ठप होने से हुई है। जब किसी बंद या वेंटिलेशन रहित व्यावसायिक इमारत में आग भड़कती है, तो वहां ऑक्सीजन का स्तर बहुत तेजी से शून्य की ओर बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी बेहद घातक और दम घोटने वाली गैसें पूरे परिसर को अपने आगोश में ले लेती हैं।” — वरिष्ठ चिकित्सक, पोस्टमार्टम पैनल
चिकित्सकों के मुताबिक, इस हादसे में भी ऐसा ही हुआ। बंद कमरों और संकरे रास्तों के कारण अंदर फंसे निर्दोष लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का न तो पर्याप्त समय मिल सका और न ही कोई रास्ता। अत्यधिक धुआं फेफड़ों में जाते ही वे चंद मिनटों में अचेत (बेहोश) हो गए होंगे और बेहोशी की हालत में ही उनकी सांसें हमेशा के लिए थम गईं।
सिंथेटिक और प्लास्टिक के सामानों ने उगला ‘धीमा जहर’
वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों ने आम जनमानस को सचेत करते हुए बताया कि अमूमन किसी भी बड़े अग्निकांड में होने वाली मौतों का मुख्य कारण आग की प्रत्यक्ष लपटें नहीं होतीं, बल्कि धुएं में घुली अदृश्य जहरीली गैसें होती हैं। अलीगंज की इस तीन मंजिला इमारत में भी भारी मात्रा में प्लास्टिक, फोम, फाइबर और अन्य सिंथेटिक सामग्रियां मौजूद थीं। इन रासायनिक वस्तुओं के जलने से अत्यधिक मात्रा में ‘कार्बन मोनोऑक्साइड’ और ‘हाइड्रोजन साइनाइड’ जैसी दमघोटू गैसों का उत्सर्जन हुआ। यह गैसें इंसानी शरीर के भीतर पहुंचते ही रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन से ऑक्सीजन सोखने की क्षमता को पूरी तरह ब्लॉक कर देती हैं। नतीजतन, इंसान बिना झुलसे भी कुछ ही सेकंड में मौत की नींद सो जाता है।
सरकार का कड़ा रुख: एसआईटी की जांच तेज और एलडीए का ताबड़तोड़ एक्शन
गौरतलब है कि बीते सोमवार की दोपहर अलीगंज इलाके की एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में अचानक भीषण आग लग गई थी, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया था। इस हादसे की भेंट चढ़े 15 लोगों में से अधिकांश अपनी जिंदगी की शुरुआत कर रहे युवा छात्र थे। इस गंभीर लापरवाही और हादसे पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। इस एसआईटी को एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत और पारदर्शी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपने की समय-सीमा दी गई है।
दूसरी तरफ, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भी नियमों को ताक पर रखकर चलाई जा रही इस अवैध इमारत के प्रबंधन के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। एलडीए ने भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों के घोर उल्लंघन को लेकर संबंधित भू-स्वामियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
सरकार ने पीड़ित और शोकाकुल परिवारों को संबल देने के लिए उचित आर्थिक मुआवजे की घोषणा भी की है। इस दर्दनाक घटना से सबक लेते हुए अब उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में जिला प्रशासनों द्वारा कोचिंग सेंटरों, स्कूलों, मॉल और बहुमंजिला व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी ऑडिट और औचक निरीक्षण का एक व्यापक महा-अभियान शुरू कर दिया गया है।





















































