उत्तराखंड में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनाव में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की प्रथम स्तरीय जांच 23 अक्टूबर से शुरू की जाएगी। इसके लिए सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जांच के दौरान मशीनों की तकनीकी स्थिति परखने के साथ मतदान कराकर भी उनकी कार्यक्षमता जांची जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने चुनाव में ईवीएम की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। जांच के दौरान कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपैट की स्थिति देखी जाएगी। मशीनों के संचालन और मतदान प्रक्रिया से जुड़े सभी जरूरी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। जो यूनिट खराब मिलेंगी, उन्हें अलग किया जाएगा। इसके बाद ही अतिरिक्त मशीनों की जरूरत का आकलन किया जाएगा।
प्रदेश में इस समय 12,543 मतदान केंद्र हैं। निर्वाचन आयोग के निर्धारित मानकों के अनुसार, मतदान केंद्रों की संख्या के मुकाबले 130 प्रतिशत ईवीएम यूनिट उपलब्ध होनी चाहिए। इस लिहाज से प्रदेश में 16 हजार से अधिक सही यूनिट की जरूरत होगी।
वर्तमान में आयोग के पास कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपैट की 22 हजार से अधिक यूनिट उपलब्ध हैं। प्रथम स्तरीय जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इनमें से कितनी मशीनें चुनाव में इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यदि पर्याप्त संख्या में यूनिट सही पाई जाती हैं तो उपलब्ध संसाधनों से आगे की तैयारी की जाएगी। जरूरत के मुताबिक सही यूनिट की संख्या कम होने पर अतिरिक्त मशीनें मंगाई जाएंगी।
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तूदास ने बताया कि विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत पहले चरण में ईवीएम की प्रथम स्तरीय जांच कराई जा रही है।





















































