मथुरा: धर्मनगरी वृंदावन के विख्यात संत प्रेमानंद महाराज के एक युवा साधक की बहुमंजिला आवासीय परिसर से नीचे गिरने के कारण दर्दनाक मौत हो गई। वराह घाट स्थित आश्रम परिसर में घटी इस अप्रत्याशित घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और स्थिति का मुआयना किया। पुलिस का प्राथमिक आकलन है कि युवक ने इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल से छलांग लगाई है, हालांकि मामले के हर पहलू की सूक्ष्मता से पड़ताल की जा रही है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश से पहुंचे मृतक के परिजनों ने आश्रम प्रबंधन के व्यवहार पर सवाल खड़े करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
वराह घाट स्थित गुरु कृपा कुंज में दोपहर को हुआ हादसा
मथुरा के पुलिस अधीक्षक (नगर) राजीव कुमार सिंह के अनुसार, यह दुखद वाकया शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे प्रकाश में आया। वराह घाट क्षेत्र में स्थित गुरु कृपा कुंज परिसर में रहने वाले रसिक बिहारी शरण नामक साधक की चार मंजिला इमारत से नीचे गिरने के कारण जान चली गई। पुलिस जांच में ज्ञात हुआ है कि साधक का वास्तविक नाम दीपक लोधी था और वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर जनपद का निवासी था। दीपक विगत लगभग दो वर्षों से संत प्रेमानंद महाराज के सानिध्य में रहकर साधना में रत था।
फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने में जुटी पुलिस, तहरीर के आधार पर जांच शुरू
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंचा और घटनास्थल को सील कर जांच-पड़ताल शुरू की। नगर पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने बताया कि फील्ड यूनिट और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने साधकों के निवास स्थल का सघन निरीक्षण किया है। घटनास्थल से दीपक का मोबाइल फोन बरामद कर तकनीकी परीक्षण के लिए भेजा गया है। शव का पंचनामा भरकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिसके उपरांत पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस अधीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़ित पक्ष की ओर से एक लिखित प्रार्थना पत्र मिला है, जिसके प्रत्येक बिंदु को जांच में शामिल करते हुए साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
मानसिक स्थिति और कूदने के कारणों की पड़ताल जारी
एसपी सिटी ने बयान में स्पष्ट किया कि अब तक की छानबीन और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर मामला प्रथम दृष्टया चार मंजिला इमारत से स्वयं छलांग लगाने का प्रतीत होता है। हालांकि, युवक किन तनावपूर्ण मानसिक परिस्थितियों में था और उसने इतना कठोर कदम क्यों उठाया, यह विस्तृत विवेचना का मुख्य बिंदु है। पुलिस टीम आवासीय परिसर में मौजूद अन्य साधकों और आश्रम के सहयोगियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि घटना से पूर्व के घटनाक्रम की स्पष्ट कड़ी जोड़ी जा सके।
जबलपुर से पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, लगाए बातचीत न कराने के आरोप
घटना की खबर मिलते ही दीपक के परिजन जबलपुर से बदहवास हालत में मथुरा पहुंचे। रोते-बिलखते परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें फोन पर केवल इतनी सूचना दी गई थी कि दीपक गिर गया है और उसका अस्पताल में ऑपरेशन किया जा रहा है, इसलिए वे फौरन पहुंचें। मृतक के परिजनों ने बताया कि रात लगभग तीन बजे जब वे प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे, तो उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई और न ही स्थिति स्पष्ट की गई। परिजनों का दावा है कि वे सुबह नौ बजे तक बाहर बैठकर सूचना का इंतजार करते रहे, जिसके बाद वे अस्पताल पहुंचे जहां उन्हें दीपक की मृत्यु की जानकारी मिली।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि दीपक पिछले दो सालों से आश्रम से जुड़ा था। दीक्षा ग्रहण करने के बाद से आश्रम प्रबंधन ने परिवार से उसका संपर्क लगभग समाप्त करा दिया था। परिजनों का कहना है कि दीपक का मोबाइल फोन जमा करा लिया गया था, जिससे वह कभी-कभार ही बात कर पाता था और उनसे सीधे मिलने की अनुमति भी नहीं दी जा रही थी। फिलहाल पुलिस इन सभी आरोपों और दावों को ध्यान में रखकर निष्पक्ष जांच में जुटी है।




















































