लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बीते दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही भारी वर्षा और आंधी-तूफान के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों पर प्रदेश का समूचा प्रशासनिक अमला युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुट गया है। शनिवार को राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने अतिवृष्टि की मार झेल रहे सभी जनपदों के जिलाधिकारियों को सीधे जमीनी स्तर पर उतरने के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित परिवारों से खुद जाकर मिलें, उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान निकालें और किसी भी हाल में आम जनमानस तथा मवेशियों की सुरक्षा से कोई समझौता न किया जाए।
पड़ोसी देश नेपाल में तेज बारिश से सीमावर्ती जनपदों में जलस्तर का संकट
राज्य के मैदानी इलाकों में पानी के कहर के बीच पड़ोसी देश नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बरसात ने संकट को और गहरा कर दिया है। राहत आयुक्त ने आगाह किया है कि नेपाल में भारी वर्षा के चलते पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत सीमा से सटे जिलों में प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। संभावित बाढ़ की आशंका को भांपते हुए प्रशासन को अतिरिक्त चौकसी बरतने को कहा गया है। संबंधित जिलाधिकारियों को जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने और एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा स्थानीय बचाव दलों को हाई अलर्ट मोड पर बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
कई जिलों में रिकॉर्ड तोड़ बरसात: कहीं 200 गुना तो कहीं 160 गुना ज्यादा पानी बरसा
आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 63 जिलों में सामान्य से अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई है। बीते 24 घंटों के भीतर समूचे प्रदेश में सामान्य के मुकाबले 19 गुना अधिक पानी बरसा है। कुछ जिलों में तो स्थिति बेहद गंभीर रही; फर्रुखाबाद में सामान्य से 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना और कन्नौज, कानपुर देहात व हरदोई में 130 गुना से अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई। वहीं भदोही, देवरिया और अलीगढ़ में स्थिति सामान्य रही, जबकि गाजीपुर में सबसे कम बारिश देखी गई। दूसरी ओर बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ में मौसम सूखा रहा। इस प्राकृतिक आपदा के चलते पिछले 48 घंटों में कुल 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि हुई है।
फील्ड में उतरकर किसानों और बेघर परिवारों को तुरंत मदद देने के निर्देश
राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों को सख्त लहजे में कहा है कि मकान गिरने से बेघर हुए परिवारों को तत्काल प्रभाव से निर्धारित आर्थिक सहायता राशि सौंपी जाए। नुकसान का त्वरित सर्वेक्षण कराकर सहायता वितरण में किसी भी प्रकार की देरी न हो। इसके साथ ही, खेतों में पानी भरने से फसलों को पहुंचे नुकसान की वास्तविक रिपोर्ट तैयार करने के लिए राजस्व व कृषि विभाग के फील्ड अफसरों को लगाया गया है, ताकि प्रभावित अन्नदाताओं को तय मानकों के आधार पर समय पर मुआवजा दिया जा सके।
आपदा प्रबंधन के लिए पीएसी, फायर ब्रिगेड और आपदा मित्र तैनात
अतिवृष्टि से उपजे हालात से निपटने के लिए जिला प्रशासन को फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और प्रशिक्षित आपदा मित्रों की मदद लेने के निर्देश दिए गए हैं। सभी बचाव दलों को प्रभावित इलाकों में लगातार गश्त करने और जलभराव वाले क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सक्रिय रखा गया है। जिलाधिकारियों को वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर खुद फील्ड में हालात की समीक्षा करने और परिस्थिति अनुसार त्वरित निर्णय लेने की हिदायत दी गई है।
कच्चे मकानों और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति
प्रशासनिक मशीनरी को निर्देशित किया गया है कि लेखपाल और ग्राम विकास अधिकारी ग्रामीण इलाकों में लगातार भ्रमण करें। कच्चे मकानों के आसपास पानी जमा न होने पाए और जल निकासी का उचित प्रबंध हो। जिन कच्चे मकानों के ढहने की आशंका है, वहां रह रहे परिवारों को बिना देर किए सुरक्षित आश्रय स्थलों पर स्थानांतरित किया जाए।
अगले 36 घंटों में राहत की उम्मीद, हेल्पलाइन 1070 पर लें मदद
मौसम विज्ञान विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, अगले 36 घंटों के बाद राज्य में मौसमी गतिविधियों में सुधार आने और मौसम सामान्य होने की संभावना है। राहत आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि जब तक अत्यधिक आवश्यक न हो, घरों से बाहर न निकलें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति में नागरिक 24 घंटे सक्रिय रहने वाली राहत हेल्पलाइन संख्या 1070 पर तुरंत संपर्क कर सकते हैं।




















































