उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत सुजौली रेंज में तेंदुए ने एक महिला को अपना शिकार बना लिया। गुरुवार की शाम जब महिला अपने घर के समीप स्थित खेत में कृषि कार्य निपटा रही थी, तभी गन्ने की घनी फसल से अचानक बाहर निकले तेंदुए ने उस पर झपट्टा मार दिया। इस भीषण वन्यजीव हमले में गंभीर रूप से जख्मी महिला की मौके पर ही जान चली गई। अचानक हुए इस खूनी हमले के बाद समूचे ग्रामीण इलाके में कोहराम मच गया और दहशत का माहौल कायम हो गया।
शाम के समय खेत में घात लगाकर बैठा था वन्यजीव
प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) अपूर्व दीक्षित द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह दुखद घटना सुजौली ग्राम पंचायत के गड़ेरियन पुरवा मजरे की है। 35 वर्षीय मृतका ममता, पत्नी राजेंद्र, गुरुवार शाम करीब छह बजे अपने घर के निकट स्थित खेत में सामान्य कामकाज कर रही थीं। उसी दौरान पास के गन्ने के खेत में छिपे तेंदुए ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। बताया गया कि वारदात का स्थान घने वन क्षेत्र से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। महिला के पति आजीविका के सिलसिले में राजस्थान में थे, जो शुक्रवार की सुबह सूचना पाकर बहराइच पहुंचे। पुलिस प्रशासन ने आवश्यक विधिक कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, वहीं वन विभाग की विशेष टीम ने घटनास्थल पर डेरा डाल दिया है।
वन विभाग की गश्त और निगरानी के बीच घटी घटना
डीएफओ ने बताया कि इलाके में इंसानी आबादी और मांसाहारी वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को रोकने के लिए विभाग लगातार सक्रिय था। इस अप्रिय घटना से कुछ दिन पूर्व सुजौली इलाके में दो व्यापक जनजागरूकता अभियान भी संचालित किए गए थे। हिंसक वन्यजीवों को रिहायशी बस्तियों से खदेड़ने के लिए प्रशिक्षित हाथियों की मदद से कॉम्बिंग और गश्त भी करवाई जा रही थी। विडंबना यह रही कि जिस स्थान पर यह हमला हुआ, उससे महज 100 से 200 मीटर की दूरी पर घटना से चंद मिनट पहले ही विभागीय टीम ने वन्यजीवों की ट्रैकिंग के लिए दो कैमरा ट्रैप लगाए थे।
सुजौली रेंज में हमलों की पुनरावृत्ति, दहशत के साये में ग्रामीण
कतर्नियाघाट और सुजौली परिक्षेत्र में हाल के दिनों में तेंदुए की आक्रामकता की कई घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। चालू महीने के दौरान ही सुजौली इलाके में एक 86 वर्षीय बुजुर्ग महिला तेंदुए का शिकार बन चुकी थीं, जबकि एक अन्य हमले में एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ था। हालांकि बहराइच जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पिंजरे लगाकर कई तेंदुओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया और उनके स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें प्राकृतिक पर्यावास में छोड़ा भी गया। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि हालिया बाढ़ के बाद मैदानी व रिहायशी इलाकों में तेंदुओं की आवाजाही तेजी से बढ़ी है, जिसके चलते सघन निगरानी और रेस्क्यू अभियान को और अधिक तेज कर दिया गया है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि खेतों में काम करते समय हर वक्त हिंसक जानवरों का डर बना रहता है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।




















































