गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित एक निजी गर्ल्स हॉस्टल से बेहद सनसनीखेज और शर्मनाक प्रकरण उजागर हुआ है, जिसने वहां रहकर पढ़ाई करने वाली छात्राओं की निजता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोहद्दीपुर इलाके में संचालित इस छात्रावास के प्रसाधन केंद्र में गुप्त तरीके से मोबाइल कैमरा लगाकर छात्राओं की अवांछित क्लिप्स रिकॉर्ड की जा रही थीं। पुलिस महकमे ने त्वरित संज्ञान लेते हुए आरोपी महिला वार्डन का व्यक्तिगत स्मार्टफोन जब्त कर लिया है। प्रारंभिक तकनीकी जांच में उपकरण से छह से सात बेहद आपत्तिजनक वीडियो मिलने की आधिकारिक पुष्टि हुई है, जिससे छात्रावास में हड़कंप मच गया है।
वार्डन की बेतुकी दलील: स्वच्छता जांच के नाम पर रखा था कैमरा
कानूनी शिकंजे में फंसने के बाद पूछताछ के दौरान महिला वार्डन ने पुलिस के समक्ष अजीबोगरीब दलील पेश की है। वार्डन का दावा है कि कुछ छात्राएं इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड्स को इधर-उधर फेंककर प्रसाधन परिसर में अस्वच्छता फैलाती थीं। इसी कृत्य को रंगे हाथों पकड़ने और निगरानी रखने के बहाने उसने मोबाइल को चालू रिकॉर्डिंग मोड में वहां छिपाया था। हालांकि प्रशासनिक व जांच एजेंसियां इस तर्क को पूरी तरह बेबुनियाद मानते हुए इसे कानूनी बचने का हथकंडा मान रही हैं। फॉरेंसिक टीम अब फोन में संग्रहीत सभी फाइलों के टाइमस्टैम्प, निर्माण तिथि और उनकी समय अवधि का सूक्ष्म विश्लेषण कर रही है।
लंबे समय से ताक-झांक का अंदेशा, छात्राओं में गहरा आक्रोश
प्रसाधन कक्ष से सक्रिय रिकॉर्डिंग डिवाइस बरामद होने के उपरांत वहां निवासरत छात्राओं का आक्रोश फूट पड़ा है। पीड़ित छात्राओं ने गहरी आशंका व्यक्त की है कि यह अनैतिक ताक-झांक महज एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि काफी लंबे समय से उनकी निजता का हनन किया जा रहा था। पुलिस ने प्रभावित छात्राओं के सिलसिलेवार बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है। तफ्तीश का मुख्य केंद्र बिंदु अब यह पता लगाना है कि क्या इन संवेदनशील वीडियो फाइलों को किसी तीसरे पक्ष को भेजा गया या इन्हें क्लाउड स्टोरेज और सोशल नेटवर्क पर अपलोड किया गया है। यद्यपि पुलिस ने अभी तक इंटरनेट पर वीडियो लीक होने के आधिकारिक प्रमाण नहीं मिलने की बात कही है।
सिंडिकेट की संलिप्तता की पड़ताल, डिजिटल फॉरेंसिक पर नजर
छात्राओं द्वारा जताई गई चिंताओं के मद्देनजर जांच अधिकारी इस बिंदु पर भी दृष्टि बनाए हुए हैं कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित सिंडिकेट या अवैध रैकेट तो सक्रिय नहीं है। अब तक की पड़ताल में सीधे तौर पर किसी गिरोह की भागीदारी का साक्ष्य नहीं मिला है, लेकिन पुलिस हर संभावित दिशा से कड़ियां जोड़ रही है। साइबर सेल की मदद से यह सत्यापित किया जा रहा है कि जब्त मोबाइल में पाई गई विवादित क्लिप्स केवल इसी हॉस्टल से संबंधित हैं अथवा इनमें अन्य स्थानों की सामग्री भी शामिल है। यह गैरकानूनी रिकॉर्डिंग कब से जारी थी और क्या किसी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए डेटा ट्रांसफर हुआ, इसकी विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।





















































