लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सूबे की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार के खिलाफ तीखा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने राज्य सरकार पर प्रशासनिक मशीनरी के मनमाने उपयोग, संवैधानिक अधिकारों के हनन और राजनीतिक विरोधियों को सुनियोजित ढंग से निशाना बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। अखिलेश यादव ने दावा किया कि मौजूदा निजाम में आम जनता और मीडिया से सवाल पूछने की लोकतांत्रिक आजादी पूरी तरह छीनी जा चुकी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए कहा कि सत्ता पक्ष एक कर्तव्यनिष्ठ महिला पत्रकार के पीछे महज इसलिए पड़ गया है, क्योंकि उसने सूबे के मुखिया से जनहित से जुड़े सीधे सवाल पूछने की हिम्मत दिखाई थी।
गुंडा एक्ट के मनमाने इस्तेमाल पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी का दिया हवाला
राजधानी लखनऊ में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा हाल ही में दिए गए फैसले को रेखांकित किया। अदालत ने गोंडा के जिलाधिकारी द्वारा जाहिद अली को गुंडा घोषित कर छह माह के लिए जिला बदर करने के आदेश को निरस्त करते हुए स्पष्ट कहा था कि यह कड़ा कानून निर्दोष नागरिकों को बेवजह प्रताड़ित करने का माध्यम नहीं बनना चाहिए। इस न्यायिक टिप्पणी का हवाला देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून और संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन को अनियंत्रित छूट देकर विरोधियों की छवि धूमिल करने के लिए झूठे और फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
विपक्ष को बदनाम करने के लिए वीडियो षड्यंत्र का आरोप, महिला आयोग से संज्ञान की मांग
अखिलेश यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विरोधी दलों के प्रमुख नेताओं की सामाजिक साख को नुकसान पहुंचाने के लिए आपत्तिजनक वीडियो तैयार करवाए जा रहे हैं। उन्होंने न्यायिक संस्थाओं से अपील की कि उच्च न्यायालय को इस पूरे षड्यंत्र का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इस तरह के अनुचित कृत्यों में कथित तौर पर शामिल एक प्रशासनिक अधिकारी के विरुद्ध एक पीड़ित महिला द्वारा लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए उन्होंने राज्य महिला आयोग से भी तत्काल हस्तक्षेप करने और कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया।
स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल, रोजगार और एमएसएमई पर नीतिगत विफलता का दावा
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सीय व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और लापरवाही का आलम यह है कि मरीजों को किसी एक बीमारी के बदले दूसरी बीमारी की दवाएं थमा दी जाती हैं। उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र की दुर्दशा का जिक्र करते हुए कहा कि लखनऊ के सरोजिनी नगर और कानपुर के औद्योगिक इलाके गंभीर संकट से जूझ रहे हैं; यदि सरकार स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के बजाय बाहर से बड़े पैमाने पर सामग्री मंगाएगी तो राज्य के छोटे उद्योग पूरी तरह तबाह हो जाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि समाजवादी पार्टी के सत्ता में लौटने पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था को समाप्त कर युवाओं को सुरक्षित व स्थायी रोजगार दिया जाएगा और वेतन विसंगतियों को दूर किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने पंचायत सहायकों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों की जायज मांगों की अनदेखी करने पर सरकार को घेरा।
महिला पत्रकार के सवाल पर मचा बवाल, वीडियो साझा कर उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए स्वतंत्र प्रेस के अधिकारों की वकालत की। उक्त वीडियो में एक महिला पत्रकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस के उपरांत उनसे प्रश्न पूछने का प्रयास करती दिखाई दे रही है, जिसमें वह स्पष्ट करती नजर आ रही है कि उसने बिना किसी पक्षपात के पूर्व में विपक्षी दलों से भी तीखे सवाल किए हैं। अखिलेश यादव ने इस घटनाक्रम को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘नारी वंदन’ का दावा करने वाली सरकार में स्वतंत्र पत्रकारिता को कुचलने की कोशिश हो रही है और प्रशासन पत्रकारों को केवल मूक दर्शक बनाकर रखना चाहता है। उन्होंने पत्रकार संगठनों और महिला आयोग से इस कथित उत्पीड़न का संज्ञान लेने की अपील की। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री शनिवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के साथ सेवा संकल्प अभियान के संदर्भ में प्रेस वार्ता कर रहे थे।





















































