सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में पुलिस और विशेष सुरक्षा इकाइयों ने जाली सिक्कों के एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट की कार्यप्रणाली का सनसनीखेज पर्दाफाश किया है। कोतवाली नगर पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी), स्वाट (एसडब्ल्यूएटी) और तकनीकी सर्विलांस सेल के संयुक्त अभियान में हाल ही में 13 सितंबर को इस गिरोह के पांच सक्रिय सदस्यों को रंगे हाथों पकड़ा गया था। आरोपियों के कब्जे से 20 रुपये मूल्यवर्ग के 6,400 जाली सिक्के, छह विशेष औद्योगिक मशीनें और डाई समेत सिक्का ढलाई की पूरी फैक्टरी बरामद की गई थी। पुलिस की त्वरित घेराबंदी से गिरोह जिले में अपनी जड़ें जमाने से पहले ही दबोच लिया गया।
लोहा, जस्ता और पीतल की कोटिंग: ऐसे तैयार होता था नकली सिक्का
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने पूछताछ में सामने आए तकनीकी तौर-तरीकों का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी बेहद चालाकी से धातु का संयोजन करते थे। सबसे पहले लोहे और जस्ते (जिंक) की शीटों को गोल आकार में काटकर सिक्के का प्राथमिक बेस तैयार किया जाता था। इसके पश्चात सिक्के के भीतरी हिस्से को तराश कर उस पर पीतल की इलेक्ट्रोप्लेटिंग या कोटिंग की जाती थी, जिससे वह हूबहू असली धात्विक चमक हासिल कर ले। अंत में विशेष डाई और भारी मशीनों के दबाव से उस पर बीस रुपये का अंक, अशोक स्तंभ और निर्धारित डिजाइन उकेरे जाते थे।
फैक्टरी से बरामद हुआ सिक्का ढलाई का पूरा तंत्र
छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपियों के अड्डे से व्यापक स्तर पर विनिर्माण सामग्री मिली। बरामदगी में 5 लोहे की मुख्य डाई, 39 बिना मोहर वाली डाई और 20 मोहर लगी डाई शामिल हैं। इसके अलावा जाली मुद्रा को असली जैसा रूप देने के लिए प्रयुक्त पॉलिश मशीनें और धातुओं को चिकना करने वाले घिसाई के पत्थर भी जब्त किए गए। जांच दल के अनुसार, गिरोह का ढांचा किसी संगठित टकसाल की भांति आधुनिक उपकरणों से लैस था, जिससे निर्मित सिक्कों को सामान्य दृष्टि से पहचान पाना बेहद कठिन था।
रोजाना 12 हजार सिक्कों का उत्पादन, टोल और ठेकों पर खपत
तफ्तीश में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि यह आपराधिक गिरोह प्रति दिन लगभग 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता रखता था। तैयार माल को बाजार में खपाने के लिए गिरोह ने सुनियोजित वितरण नेटवर्क बना रखा था। इन सिक्कों को मुख्य रूप से शराब की दुकानों, राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित टोल प्लाजा, पेट्रोल पंपों और छोटे खुदरा व्यापारियों के बीच भारी नकदी प्रवाह के दौरान चतुराई से चला दिया जाता था, जहां आमतौर पर सिक्कों की गहन जांच नहीं होती।
मोहाली का उपकार लूथरा मास्टरमाइंड, करोड़ों की हेराफेरी का दावा
अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे जाली नेटवर्क का सरगना पंजाब के मोहाली का निवासी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह है। वह वर्ष 2001 से ही नकली करेंसी और जाली सिक्कों के अवैध धंधे में संलिप्त रहा है। हिरासत में पूछताछ के दौरान आरोपियों ने डींग हांकते हुए दावा किया कि वे अब तक देश के विभिन्न बाजारों में 70 करोड़ रुपये से अधिक के जाली सिक्के खपा चुके हैं।
हालांकि पुलिस के प्राथमिक आकलन में यह अवैध कारोबार 10 से 11 करोड़ रुपये के आसपास प्रतीत हो रहा है। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि वास्तविक वित्तीय हेराफेरी की पुष्टि सभी खातों और नेटवर्क की वित्तीय फॉरेंसिक जांच के उपरांत ही संभव होगी। सुरक्षा एजेंसियां अब गिरोह के वित्तीय प्रवाह और अन्य राज्यों में फैले संभावित सहयोगियों की धरपकड़ में जुटी हैं।





















































