अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर संचार माध्यमों में फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं और अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। न्यास ने दो-टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि इस उच्च पद के लिए चयन की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, चरणबद्ध और पूर्ण पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है। सार्वजनिक स्तर पर तथ्यों को रखते हुए न्यास ने बताया कि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी नहीं हुई है और शीर्ष तीन योग्य उम्मीदवारों का चयन केवल उनकी योग्यता और निर्धारित मापदंडों के आधार पर ही हुआ है।
अफवाहों पर न्यास का कड़ा रुख, महासचिव ने रखा आधिकारिक पक्ष
न्यास के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरी ने एक औपचारिक वक्तव्य जारी करते हुए स्पष्ट किया कि संस्था का उद्देश्य मीडिया में प्रसारित गलत धारणाओं को दूर कर सत्य को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति से जुड़ी हर गतिविधि विधिवत रूप से प्रलेखित (डॉक्युमेंटेड) है। संस्थागत विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए न्यास ने चयन प्रक्रिया के सिलसिलेवार आंकड़े और तथ्य सार्वजनिक किए हैं, ताकि किसी भी तरह के भ्रम या संदेह की गुंजाइश न रहे।
खोज समिति का गठन और 5,585 आवेदनों की गहन समीक्षा
सख्त चयन प्रक्रिया का ब्योरा साझा करते हुए न्यास ने बताया कि इस महत्वपूर्ण पद के लिए 6 जुलाई 2026 को एक आधिकारिक खोज समिति (सर्च कमेटी) स्थापित की गई थी। इस समिति के समक्ष देशभर से कुल 5,585 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की थी। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों की निष्पक्ष जांच के लिए आधुनिक तकनीक और मानव विशेषज्ञता दोनों का सहारा लिया गया। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर, पुणे और संबलपुर जैसे तीन प्रमुख केंद्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रारंभिक स्क्रीनिंग के साथ-साथ विशेषज्ञों द्वारा बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली अपनाई गई।
अयोध्या में आयोजित हुआ 16 शीर्ष प्रत्याशियों का साक्षात्कार
विभिन्न चरणों के कड़े परीक्षण के पश्चात कुल 16 श्रेष्ठ प्रत्याशियों को अंतिम साक्षात्कार सूची में जगह मिली। इन सभी शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों को आमने-सामने के संवाद के लिए आमंत्रित किया गया। साक्षात्कार का यह महत्वपूर्ण चरण 11 और 12 अगस्त 2026 को अयोध्या की पावन भूमि पर आयोजित किया गया था। इस दौरान प्रत्येक प्रतिभागी की प्रशासनिक क्षमता, अनुभव और दृष्टिकोण का गहन परीक्षण किया गया।
जितेंद्र मिश्र की उपस्थिति पर उठा विवाद पूरी तरह निराधार
मीडिया के एक वर्ग में एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र की साक्षात्कार में गैर-हाजिरी को लेकर किए जा रहे दावों को न्यास ने सिरे से खारिज कर दिया है। न्यास ने स्पष्ट रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि जितेंद्र मिश्र 11 अगस्त 2026 को पहली पाली के साक्षात्कार में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए थे। खोज समिति ने सभी साक्षात्कारों के समापन के बाद 1 सितंबर 2026 को अपनी अंतिम मूल्यांकन रिपोर्ट और सिफारिशें न्यास को सौंपी थीं। इसके ठीक अगले दिन यानी 2 सितंबर 2026 को न्यास ने पारदर्शी व्यवस्था का पालन करते हुए शीर्ष तीन चयनित नामों—जितेंद्र मिश्र, संजय प्रतापसिंह विश्वास राव और श्रुति भारद्वाज—को सार्वजनिक मंच पर साझा किया था।
पारदर्शिता और संस्थागत सुशासन के उच्चतम मानक लागू
न्यास ने जोर देकर कहा कि जितेंद्र मिश्र का नाम शीर्ष तीन अनुशंसित प्रत्याशियों में शामिल होना ही इस बात का पुख्ता दस्तावेजी प्रमाण है कि वे पूरी प्रक्रिया का हिस्सा रहे और मेरिट के आधार पर चुने गए। साक्षात्कार में उनके शामिल न होने का दावा तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत और भ्रामक है। अयोध्या पहुंचे प्रत्येक अंतिम अभ्यर्थी की पहचान विधिवत दर्ज की गई थी और पूरी चयन प्रक्रिया संस्थागत शासन के उच्चतम पैमानों पर खरी उतरी है। न्यास ने दोहराया कि वह शुचिता और स्पष्टता के लिए वचनबद्ध है और इस चयन से जुड़ी किसी भी जांच अथवा समीक्षा के लिए सभी तथ्यात्मक दस्तावेज उपलब्ध कराता रहेगा।





















































