नोएडा: दिल्ली-एनसीआर में सस्ते कर्ज का झांसा देकर देश भर के मासूम लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। नोएडा पुलिस के थाना फेस-1 की टीम ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और तकनीकी अभियान चलाते हुए सेक्टर-2 में चल रहे एक अवैध कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से तीन युवकों और दो युवतियों सहित कुल पांच शातिर जालसाजों को दबोचने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरोह सीधे-साधे लोगों को बेहद कम ब्याज दरों पर तत्काल लोन मुहैया कराने का सुनहरा सपना दिखाता था और फिर फाइल चार्ज व प्रोसेसिंग फीस के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूल कर रफूचक्कर हो जाता था।
‘ऑपरेशन साइबर वज्र’ के तहत 2500 मोबाइल नंबर खंगालने पर खुली पोल
इस हाईटेक गिरोह को बेनकाब करने के लिए नोएडा पुलिस ने बकायदा ‘ऑपरेशन साइबर वज्र’ लॉन्च किया था। पुलिस की लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस शाखा को काफी समय से डिजिटल फ्रॉड करने वाले कुछ संदिग्ध इनपुट मिल रहे थे। इसके बाद पुलिस टीम ने थाना स्तर पर चिन्हित किए गए करीब 159 संदिग्ध बैंक खातों की कुंडली खंगाली।
जांच का दायरा बढ़ाते हुए विभिन्न बैंकिंग संस्थानों के 19 संवेदनशील ‘रेड जोन’ और साइबर ठगी के हॉटस्पॉट की पहचान की गई। इस ऑपरेशन के दौरान लगभग 2500 से अधिक संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल्स और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज दर्जनों शिकायतों का बारीकी से तकनीकी विश्लेषण किया गया। लंबी तफ्तीश के बाद जब पुलिस को सेक्टर-2 स्थित डी-80 नामक इमारत की पहली मंजिल पर चल रही गतिविधियों पर पुख्ता शक हुआ, तो पुलिस की स्पेशल टीम ने योजनाबद्ध तरीके से वहां अचानक छापेमारी कर दी।
जानिए किस तरह जाल में फंसाते थे शिकार, स्क्रिप्ट बुक से होता था खेल
पुलिस की गिरफ्त में आए शातिर आरोपियों ने पूछताछ के दौरान अपने पूरे वर्किंग पैटर्न और मॉडस ऑपरेंडी का खुलासा किया है। आरोपियों ने बताया कि वे सबसे पहले विभिन्न डिजिटल माध्यमों और डेटा वेंडर्स से उन लोगों की गोपनीय सूची या डेटाबेस हासिल करते थे, जिन्हें तत्काल पैसों की जरूरत होती थी या जो लोन के लिए ऑनलाइन सर्च कर रहे होते थे।
इसके बाद कॉल सेंटर में मौजूद टेलीकॉलर्स उन्हें फोन करते थे और एक खास स्क्रिप्ट (कॉलिंग डेटा और स्क्रिप्ट बुक) के जरिए बात करके उन्हें अपने जाल में फंसाते थे। ग्राहकों को झांसा दिया जाता था कि उन्हें बेहद नाममात्र की ब्याज दरों पर बिना किसी कठिन कागजी कार्रवाई के तुरंत लोन स्वीकृत कर दिया जाएगा। जब ग्राहक उनकी बातों में आकर पूरी तरह भरोसे में आ जाता था, तो आरोपी उससे लोन पास कराने, इंश्योरेंस कराने या प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे।
पहचान पत्र और ओटीपी लेकर साफ कर देते थे बैंक खाते
ठगी का यह खेल सिर्फ प्रोसेसिंग फीस तक ही सीमित नहीं था। आरोपी लोन की औपचारिकता पूरी करने के बहाने ग्राहकों से उनके बेहद संवेदनशील निजी दस्तावेज जैसे पहचान पत्र, टैक्स संबंधी जरूरी दस्तावेज और बैंक खातों की गोपनीय जानकारी भी अपने पास मंगा लेते थे। कई मामलों में तो शातिर अपराधी बातों-बातों में झांसा देकर पीड़ितों के मोबाइल पर आने वाला वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भी हासिल कर लेते थे और उनके बैंक खातों को पूरी तरह साफ कर देते थे। एक बार मोटी रकम खाते में ट्रांसफर होने के बाद पीड़ित ग्राहकों के नंबरों को ब्लॉक कर दिया जाता था और उन्हें न तो कभी कोई लोन मिलता था और न ही उनकी जमा पूंजी वापस होती थी।
देशव्यापी नेटवर्क: एनसीआरपी पर दर्ज हैं 10 से ज्यादा गंभीर मामले
नोएडा पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। इस अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर भारत के अलग-अलग राज्यों से 10 से अधिक संगीन मामले और शिकायतें पहले से ही दर्ज हैं। प्राथमिक जांच के मुताबिक, इन जालसाजों ने देश के सुदूर हिस्सों में रहने वाले सैकड़ों सीधे-साधे नागरिकों को अपनी ठगी का शिकार बनाकर अब तक करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है। पुलिस विभाग अब इस गिरोह के सभी बैंक खातों को सीज करने, उनके वित्तीय लेन-देन के इतिहास को खंगालने और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मास्टरमाइंड्स व सहयोगियों की तलाश में जुटी है ताकि पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद किया जा सके।
बागपत, बुलंदशहर से लेकर मुजफ्फरनगर तक फैले हैं आरोपियों के तार
पुलिस के अनुसार, इस फर्जीवाड़े में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान बेहद शातिर अपराधियों के रूप में हुई है, जो एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में ठिकाने बदलकर रह रहे थे।
- पवन कुमार: यह मूल रूप से बुलंदशहर का रहने वाला है और वर्तमान में पुलिस से बचने के लिए नोएडा के सेक्टर-27 में अपनी जगह बदल-बदल कर रह रहा था।
- मोहित: यह मूल रूप से बागपत का निवासी है और दिल्ली के मयूर विहार फेस-1 इलाके में शरण लिए हुए था।
- हर्ष शर्मा: मुजफ्फरनगर जिले का रहने वाला यह आरोपी नोएडा के सेक्टर-66 स्थित ममूरा गांव में रह रहा था।
- स्वाती और प्रीती: गिरफ्तार की गई दोनों महिला आरोपी क्रमशः नोएडा के सेक्टर-135 और सेक्टर-26 की निवासी हैं, जो कॉल सेंटर में कॉलिंग और बिलिंग का जिम्मा संभालती थीं।
लैपटॉप, चेकबुक और इंटरनेट राउटर समेत भारी मात्रा में सामान जब्त
फेस-1 थाना पुलिस ने छापेमारी के दौरान मौके से साइबर अपराध को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल होने वाले कई डिजिटल उपकरण और साक्ष्य बरामद किए हैं। बरामद किए गए सामानों की सूची इस प्रकार है:
| बरामद सामान का विवरण | कुल संख्या |
|---|---|
| स्मार्ट मोबाइल फोन (कॉलिंग हेतु) | 05 |
| हाईटेक लैपटॉप (डेटा प्रोसेसिंग हेतु) | 03 |
| विभिन्न बैंकों की चेकबुक | 06 |
| बैंक पासबुक | 01 |
| कस्टमर कॉलिंग डेटा शीट्स | 160 |
| कॉलिंग स्क्रिप्ट बुक्स | 11 |
| फर्जी बिलिंग बुक | 01 |
| हाई-स्पीड इंटरनेट राउटर | 01 |
पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस मामले की हर पहलू से विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी जांच जारी है, और बहुत जल्द इस रैकेट को तकनीकी बैकअप देने वाले अन्य आरोपियों को भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।





















































