लखनऊ: उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी अब भारत-भूटान संबंधों का एक नया प्रतीक बनने जा रही है। भूटान सरकार को यहाँ बौद्ध मंदिर और अतिथि गृह बनाने के लिए दो एकड़ से अधिक की भूमि मात्र एक रुपए वार्षिक किराए पर 30 वर्षों के लिए दी गई है। इस ऐतिहासिक समझौते से न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी, बल्कि वाराणसी और सारनाथ में बौद्ध तीर्थयात्रियों की संख्या में भी अभूतपूर्व वृद्धि होने का अनुमान है।
🛕 कूटनीति और आस्था का मिलन: ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर
बुधवार को उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग और रॉयल गवर्नमेंट ऑफ भूटान के बीच इस लीज एग्रीमेंट पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए। यह समारोह प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह और अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
भूटान की ओर से नई दिल्ली स्थित राजनयिक मिशन की उप-प्रमुख ताशी पेल्डन ने इस करार पर हस्ताक्षर किए। वहीं, पर्यटन विभाग के विशेष सचिव मृदुल चौधरी ने भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर चांसरी प्रमुख सांगे थिनले और वित्त सलाहकार चिमी वांगमों भी मौजूद रहे।
📍 कहाँ बनेगा भूटानी धाम? प्राइम लोकेशन का चयन
वाराणसी के अजईपुर, परगना कोलअसला और तहसील पिंडरा क्षेत्र में स्थित यह दो एकड़ की भूमि अत्यंत सामरिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह भूखंड बौद्ध परिपथ के प्रमुख केंद्र सारनाथ से निकटता के कारण विशेष रूप से चुना गया है।
प्रशासन ने भूमि हस्तांतरण से जुड़ी सभी औपचारिकताएँ पहले ही पूरी कर ली हैं। अब यहाँ भूटानी शैली में भव्य बौद्ध मंदिर और एक आधुनिक अतिथि गृह का निर्माण किया जाएगा, जहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर के बौद्ध भिक्षु और श्रद्धालु ठहर सकेंगे।
🧭 बौद्ध परिपथ को मिलेगी नई उड़ान: योगी सरकार की रणनीति
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बौद्ध सर्किट के विकास को शीर्ष प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया:
- कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहले से ही विदेशी पर्यटकों के लिए सुविधाजनक बना है।
- संकिसा, कपिलवस्तु, श्रावस्ती जैसे अन्य बौद्ध स्थलों पर भी उच्चस्तरीय सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
- इस परियोजना से स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और विदेशी पर्यटकों की आमद बढ़ेगी।
मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 2017 से अब तक पर्यटन विभाग द्वारा किए गए सभी एमओयू की समीक्षा की जाए और ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाया जाए।
🤝 भूटान का आभार: सांस्कृतिक कूटनीति की नई मिसाल
भूटान की ओर से ताशी पेल्डन ने उत्तर प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक रिश्तों को नई गहराई देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मंदिर न केवल पूजा स्थल होगा, बल्कि भारत-भूटान मैत्री का जीवंत प्रतीक भी बनेगा।
🔑 संभावनाएँ और प्रभाव: धर्म, पर्यटन और विकास की त्रिवेणी
- धार्मिक पर्यटन: सारनाथ पहले से ही विश्वभर के बौद्धों के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल है। अब भूटानी मंदिर बनने से यह आकर्षण और बढ़ेगा।
- रोज़गार: निर्माण कार्य से लेकर पर्यटन सेवाओं तक, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होगा।
- अंतरराष्ट्रीय छवि: वाराणसी एक बार फिर साबित करेगा कि वह सभी धर्मों और देशों के प्रति खुली नगरी है।





















































