उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से जालसाजी और धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा जगत से लेकर सुरक्षा एजेंसियों तक के होश उड़ा दिए हैं। कानपुर पुलिस ने मंगलवार को एक बेहद हाई-टेक और संगठित अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश करने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह शातिर गिरोह देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्रियां और अंकपत्र (मार्कशीट) तैयार कर उन्हें कूरियर के जरिए विदेशों तक सप्लाई कर रहा था। पुलिस ने इस गिरोह के मुख्य सूत्रधार सहित कुल चार सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है, जो एक रिहायशी इलाके में बैठकर इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहे थे।रिहायशी इमारतों में चल रही थी अवैध डिग्रियों की ‘फैक्ट्री’मामले की जानकारी देते हुए पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि पुलिस को किदवई नगर और बेकनगंज थाना क्षेत्रों में एक अवैध प्रिंटिंग सेटअप संचालित होने की सटीक खुफिया सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीमों ने योजनाबद्ध तरीके से इन इलाकों में छापेमारी की। जांच के दौरान चमनगंज के नाला रोड पर स्थित इकबाल बिल्डिंग की एक रिहायशी इकाई में चल रही अत्याधुनिक प्रिंटिंग लैब को देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। इस ठिकाने से हाई स्कूल, इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी स्तर तक के जाली शैक्षणिक दस्तावेज धड़ल्ले से तैयार किए जा रहे थे।मास्टरमाइंड जिया-उल-हसन और उसके तीन सगे भाई दबोचे गएपुलिस ने इस गिरोह के मुख्य सरगना की पहचान जिया-उल-हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ (32 वर्ष) के रूप में की है। जिया-उल-हसन मूल रूप से हीरामन पुरवा का निवासी है, लेकिन वर्तमान में वह चमनगंज के नाला रोड स्थित इकबाल बिल्डिंग में रह रहा था। इस काले कारोबार में उसका साथ कोई बाहरी नहीं, बल्कि उसके अपने सगे भाई दे रहे थे। पुलिस ने जिया-उल-हसन के साथ उसके तीन भाइयों—हसन आसिफ (34 वर्ष), आमिर अहमद (33 वर्ष) और नूरुद्दीन (30 वर्ष) को भी रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। चारों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।असली से भी शानदार थी प्रिंटिंग, छापेमारी में मिला जखीरापुलिस द्वारा बरामद की गई सामग्री का विवरण:इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: 2 हाई-एंड लैपटॉप, 1 डेस्कटॉप कंप्यूटर, 3 एक्सटर्नल हार्ड डिस्क, वाई-फाई राउटर और सीपीयू।प्रिंटिंग टूल: अत्याधुनिक कलर प्रिंटर, 80 होलोग्राम स्ट्रिप, होलोग्राम डाई और फ्लोटिंग पंच डाई।अवैध दस्तावेज: विभिन्न यूनिवर्सिटी की 141 रबर स्टांप, 830 ब्लैंक (खाली) मार्कशीट और भारी मात्रा में विशेष प्रिंटिंग पेपर।पुलिस आयुक्त ने बताया कि इस गिरोह द्वारा तैयार किए गए फर्जी सर्टिफिकेट्स की फिनिशिंग इतनी बेहतरीन थी कि उन्हें पहली नजर में पकड़ पाना नामुमकिन था। कई मामलों में तो इन जाली डिग्रियों के कागज और प्रिंट की गुणवत्ता असली विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए जाने वाले मूल प्रमाणपत्रों से भी कहीं ज्यादा बेहतर और आकर्षक नजर आ रही थी।एक डिग्री की कीमत ₹15,000; देश के 8 बड़े विश्वविद्यालय निशाने परप्रारंभिक पूछताछ और जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह पिछले कई वर्षों से पूरी तरह सक्रिय था और अब तक सैकड़ों लोगों को शिकार बना चुका था। गिरोह के सदस्य प्रत्येक फर्जी अंकपत्र या डिग्री तैयार करने के एवज में ग्राहकों से 10,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक की मोटी रकम वसूलते थे। यह नेटवर्क देश के कम से कम आठ बड़े और नामचीन विश्वविद्यालयों व शिक्षा बोर्डों के नाम का दुरुपयोग कर रहा था। इन विश्वविद्यालयों की सूची इस प्रकार है:क्र.सं.लक्षित विश्वविद्यालयों/संस्थानों के नाम1छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर2अन्नामलाई विश्वविद्यालय3लिंगायाज विद्यापीठ4कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी5उस्मानिया यूनिवर्सिटी6डीवाई पाटिल विद्यापीठ7अलगप्पा यूनिवर्सिटी8आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी





















































