उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में शनिवार को राजनीतिक माहौल उस वक्त गरमा गया जब युवा परिषद के कार्यकर्ताओं ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और कांग्रेस पार्टी की नीतियों के विरोध में विशाल प्रदर्शन किया। संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा की रक्षा का संकल्प लेते हुए कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और भारतीय निर्वाचन आयोग के पक्ष में एकजुटता प्रदर्शित की। शहर में एक संगठित ‘न्याय मार्च’ निकालते हुए युवाओं ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेताओं को आड़े हाथों लिया और सीधे तौर पर राहुल गांधी व प्रियंका गांधी से इस्तीफे की मांग कर डाली।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का तीखा विरोध
प्रदर्शन के दौरान युवा परिषद के कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक स्वायत्तता पर प्रहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने वालों का पुरजोर विरोध किया और निर्वाचन आयोग के प्रति अपना पूर्ण विश्वास जताया। मार्च में शामिल प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां, बैनर और पोस्टर लेकर चल रहे थे, जिन पर कांग्रेस नेतृत्व और सीजेपी के विरुद्ध कड़े संदेश लिखे हुए थे। इस दौरान ‘राहुल गांधी इस्तीफा दो’, ‘एक समोसा दो मिठाई, कॉकरोचों की होगी पिटाई’ तथा ‘नक्सलियों के यार कॉकरोच, देश के गद्दार कॉकरोच’ जैसे जोशीले नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने जमकर आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सीजेपी से जुड़े लोगों के खिलाफ प्रशासन अविलंब दंडात्मक कार्रवाई करे और उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
‘संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश बर्दाश्त नहीं’
प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ता एके सिंह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए विपक्ष के रुख पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की दुहाई देकर आम जनता को भ्रमित किया जा रहा है और उन्हें संवैधानिक संस्थाओं के सामने खड़ा करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का सबसे बड़ा स्तंभ निर्वाचन आयोग है। हालिया चुनावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि लगभग 98 करोड़ मतदाताओं ने अपनी सहभागिता दर्ज कर व्यवस्था पर भरोसा जताया है। अधिवक्ता सिंह ने विपक्ष को नसीहत दी कि यदि उनके पास अपनी शिकायतों के पक्ष में कोई ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक अनर्गल प्रलाप करने के बजाय अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
‘भारत को श्रीलंका या बांग्लादेश नहीं बनने देंगे’
युवा परिषद के प्रतिनिधियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह प्रदर्शन केवल एक सांकेतिक मार्च था। उन्होंने साफ किया कि विदेशी ताकतों की शह पर या संदिग्ध फंडिंग के जरिए देश के भीतर पड़ोसी मुल्कों जैसी अस्थिरता पैदा करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भारत को नेपाल, श्रीलंका अथवा बांग्लादेश की राह पर धकेलने का मंसूबा पालने वालों को युवा शक्ति मुंहतोड़ जवाब देगी। कार्यकर्ताओं ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का यह सिलसिला नहीं थमा, तो आने वाले दिनों में लाखों नौजवान सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से विपक्षी राजनीति को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए बाध्य होंगे।




















































